'मिशन क्लीन गंगा' पर जुटी पूरी मोदी सरकार
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केंद्र सरकार गंगा को निर्मल व अविरल बनाने के साथ ही पर्यटन और परिवहन को बढ़ावा देने जा रही है। इसके लिए सरकार ने कार्य योजना तैयार कर उस पर अमल भी करने जा रही है।
इसके तहत शुक्रवार को सड़क परिवहन, राजमार्ग व जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई गंगा कार्य योजना की पहली बैठक में पांच प्रमुख मंत्रालय के प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया।
गंगा को पर्यटन और जल परिवहन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत बनारस से हुगली के बीच गंगा पर 11 टर्मिनल बनाने की योजना है। नदी में मछली पालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा तथा बिजली भी पैदा की जाएगी। प्रत्येक सौ किलोमीटर पर बैराज बनाने की योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
गंगा नदी के जरिए बढ़ाया जाएगा व्यापार
गडकरी ने बताया कि सरकार की योजना गंगा नदी में यात्रियों और सामानों की आवाजाही शुरू करना है। इससे नदियों के जरिये कोयला, उर्वरक और अनाज आदि की आवाजाही का विकास संभव हो सकेगा।
इन सभी को कार्यरूप देने के लिए जल संसाधन मंत्रालय की अगुवाई में सचिवों की एक अंतर मंत्रालय समिति बनाई जाएगी। इस समिति को एक महीने में योजना तैयार करने के लिए कहा जाएगा।
गडकरी के मुताबिक गंगा की गहराई और चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। गंगा की तलहटी में जमी गाद को निकालकर उसकी गहराई में तीन मीटर की बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही उसकी चौड़ाई को भी 45 मीटर तक बढ़ाया जाएगा। गडकरी ने बताया कि इस विषय में जल्द ही एक कैबिनेट नोट तैयार किया जाएगा।
पांच मंत्रालय मिलकर करेंगे गंगा नदी की सफाई पर काम
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन गंगा अनुसंधान संस्थान बनाने का भी प्रस्ताव आया है। यह संस्थान संभवत: रुड़की में बनेगा और पर्यटन मंत्रालय नदियों के किनारे पर्यटन विकसित करने संबंधी कदम उठाएगा।
पर्यावरण मंत्रालय कानपुर और अन्य स्थानों पर विभिन्न उपाय कर नदी को अपरिवर्तित बनाए रखेगा। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा के विषय में आगे बढ़ने के लिए सभी पांचों मंत्रियों ने समय-समय पर मिलने का निर्णय किया है।
देश की अन्य नदियों के विकास के लिए भी ऐसे मानक तैयार किए जाएंगे। बैठक में गडकरी और उमा भारती के अलावा पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर और पर्यटन मंत्री श्रीपद यशो नाइक भी उपस्थति थे।