ध्यानचंद को भारत रत्न पर मोदी सरकार का यू-टर्न
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हॉकी के जादूगर ‘दद्दा’ ध्यानचंद को भारत रत्न देने के सवाल पर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। पहले तो लगा एनडीए सरकार आखिर उस भूल को सुधारने जा रही है, जो बीते वर्ष यूपीए सरकार ने की थी। लेकिन भूल सुधारने की बजाय सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी किरकिरी जरूर करा ली।
गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा के सवाल पर लिखित जवाब में कहा कि भारत रत्न के लिए ध्यानचंद के नाम की सिफारिश कई पक्षों से आई है। इसे उनकी ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया गया है।
मगर लोकसभा में यह उत्तर पेश होने के तुरंत बाद ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने अपने ही मंत्री के उत्तर को खारिज करते हुए कहा कि सरकार की ओर से भारत रत्न के लिए किसी के भी नाम की सिफारिश नहीं की गई है।
राजनाथ ने खोला राज
सरकार की किरकिरी का कारण यह बताया जा रहा है कि लोकसभा में जो उत्तर पेश किया गया है। उसमें पिछले वर्ष की स्थिति का हवाला दिया गया है न कि इस वर्ष की।
मिश्रा की ओर से गृह मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या भारत रत्न के लिए किसी के नाम की सिफारिश की गई है? इसी का किरेन रिजिजू ने जवाब पेश किया, लेकिन यह नहीं लिखा कि किस वर्ष के लिए ध्यानचंद के नाम की सिफारिश पीएमओ को की गई है।
इस लिखित उत्तर के बाद ही माना गया कि ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। लेकिन थोड़ी ही देर बाद राजनाथ सिंह ने लोकसभा से निकल कर संसद में ही मीडिया से घोषणा कर दी कि ऐसी कोई भी सिफारिश पीएमओ को नहीं की गई है। इसके बाद इस मुद्दे पर सरकार की किरकिरी का दौर शुरू हो गया।
वहीं सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत रत्न दिए जाने की घोषणा अमूमन गणतंत्र दिवस के मौके पर होती है। इसी समय ही भारत रत्न के दावेदारों का नाम सरकार खोलेगी। सूत्र यह भी बताते हैं कि 15 अगस्त के मौके पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत रत्न के लिए किसी भी नाम की घोषणा नहीं करेंगे।