फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Modi government in the overthrow of the UPA government

यूपीए के पूरे सफाए में जुटी मोदी सरकार

Fri, 20 Jun 2014 11:56 AM IST
Updated Fri, 20 Jun 2014 11:56 AM IST
विज्ञापन
Modi government in the overthrow of the UPA government

यूपीए सरकार के दौरान नियुक्त राज्यपालों के बाद अब तमाम आयोगों और प्रमुख संस्थानों के अहम पदों पर काबिज लोगों को हटाने की कसरत भी मोदी सरकार ने शुरू कर दी है।

विज्ञापन


राजनीतिक नियुक्ति की वजह से निजाम बदलने के बाद इन आयोगों के अध्यक्षों को कुर्सी छोड़ने के लिए कहा जा रहा है ताकि मोदी सरकार अपने लोगों की नियुक्ति यहां कर सके।
विज्ञापन


सरकार के इस दबाव में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शशिधर रेड्डी ने इस्तीफा भी दे दिया है। जबकि एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया, महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा के साथ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष पद से डा. कर्ण सिंह को भी हटाने की सरकार की तैयारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि संवैधानिक निकायों के प्रमुखों को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं है। लेकिन शुरूआती तौर पर उन्हें फोन कर इस्तीफा देने के लिए कहा जा रहा है।

मोदी सरकार करेगी अपने लोगों की नियुक्ति

Modi government in the overthrow of the UPA government

इस बाबत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से जुड़े महिला आयोग, बाल आयोग, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय से जुड़े अनुसूचित जाति आयोग, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्षों को इस्तीफा देने के लिए कहा गया है।

जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों को इस्तीफे के लिए कहा गया है। लेकिन अध्यक्ष इस संदर्भ में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।

एनडीएमए के उपाध्यक्ष शशिधर रेड्डी ने तीन दिन पहले ही अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेजने की पुष्टि करते हुए कहा कि राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के बाद इसमें कुछ अस्वाभाविक नहीं है।

मोदी सरकार लेगी सबका इस्तीफा

Modi government in the overthrow of the UPA government

वहीं महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा फिलहाल विदेश यात्रा पर हैं। लेकिन यात्रा पूर्व दिये गए बयान में उन्होंने किसी दबाव में कुर्सी छोड़ने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि संवैधानिक नियुक्ति होने के बावजूद पद छोड़ने का दबाव बनाना ठीक नहीं है।

बाल आयोग की अध्यक्ष कुशल सिंह ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के दो आला अधिकारियों की ओर से इस्तीफे का दबाव बनाने की बात कबूली थी। उन्होंने इस मसले को कोर्ट के सामने भी रखा। फिलहाल यह मसला न्यायालय के अधीन है।

दूसरी ओर अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया ने पद छोड़ने के दबाव पर असहमति जताई है। इसी तरह दूसरे आयोगों के अध्यक्ष भी मना कर रहे हैं। लेकिन सरकारी खेमे से उन्हें फोन जाने की बात जरूर कही जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed