आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार के अहम फैसले
भारी विरोध के बावजूद केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) सरकार ने आर्थिक क्षेत्र में असर डालने वाले तीन अहम बिलों को मंजूरी दे दी है।
आर्थिक सुधार के मोर्चे पर एनडीए सरकार ने तीन बड़े फैसले किए हैं। बीमा और कोयला पर सरकार ने अध्यादेश लाने का फैसला किया है। बीमा बिल पर सरकार को राज्यसभा में भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। लोकसभा में बीमा बिल पास हो चुका था पर राज्यसभा में विपक्ष इसमें संशोधन करने को लेकर हंगामा कर रहा था।
वहीं वर्ष 1993 से कोल ब्लॉक के आवंटन को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से रद्द किए जाने के बाद से ही सरकार कोल अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही थी। कोल ब्लॉक आवंटन में हुए घोटाले के बाद एनडीए और यूपीए सरकार के कार्यकाल में आवंटित हुए कुछ कोल ब्लॉकों को छोड़कर सरकार ने अन्य सभी कोल ब्लॉक रद्द कर दिए थे।
स्वास्थ्य उपकरणों के क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश
एनडीए सरकार के लिए ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के अलावा अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कोल अध्यादेश लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
स्वास्थ्य उपकरणों के क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपनी मंजूरी दे दी है। स्वास्थ्य उपकरणों के क्षेत्र को फार्मा सेक्टर से अलग कर दिया गया है।
आर्थिक जगत ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाने से देश में 6-8 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आएगा।
साथ ही बीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में नए रोजगार भी पैदा होंगे। वित्त मंत्री अरूण जेटली का मानना है कि इन फैसलों से अर्थव्यवस्था की रफ्तार में तेजी आएगी। वहीं बैंकों में सुधार को लेकर तीन जनवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी सरकारी क्षेत्र के बैंकों के साथ बैठक करेंगे।