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अल्पसंख्यकों पर अमेरिका के खिलाफ मोदी सरकार

Fri, 01 May 2015 01:21 PM IST
एजेंसी/वाशिंगटन
एजेंसी/वाशिंगटन Updated Fri, 01 May 2015 01:21 PM IST
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Modi government denied the US report on minorities.

अल्पसंख्यकों पर हमले, जबरन धर्मांतरण और घर वापसी जैसे मुद्दों को लेकर अमेरिकी संसद के एक पैनल ने अपनी सालाना रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी सरकार की तीखी आलोचना की है। हालांकि मोदी सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।

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यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने 2015 की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत में अल्पसंख्यकों को हिंसक हमलों, जबरन धर्मांतरण और घर वापसी जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
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पैनल ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने अल्पसंख्यक समुदायों पर अपमानजनक टिप्पणियां कीं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद जैसे हिंदू संगठनों ने हिंसक हमलों और जबरन धर्मांतरण को अंजाम दिया।
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अमेरिका के एक पैनल की रिपोर्ट में आलोचना

Modi government denied the US report on minorities.

पैनल ने अपनी रिपोर्ट में ओबामा प्रशासन से कहा है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार पर दबाव बनाए, ताकि अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के मामले में भारत सरकार अधिकारियों और धार्मिक नेताओं को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाए।

पैनल ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र होने के बावजूद भारत को अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों में धार्मिक हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं।

रिपोर्ट में मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदायों और कुछ गैर सरकारी संगठनों के नेताओं के 2014 के दौरान विभाजनकारी अभियानों का जिक्र किया गया है।

4,000 ईसाई परिवारों के घर वापसी की थी योजना

Modi government denied the US report on minorities.

पैनल ने कहा कि दिसंबर 2014 में उत्तर प्रदेश में हिंदू समूहों ने कम से कम 4,000 ईसाई परिवारों और 1,000 मुस्लिम परिवारों को घर वापसी के नाम पर जबरन हिंदू बनाने की योजना की घोषणा की थी।

इसके लिए हरेक ईसाई को दो लाख रुपये और हरेक मुस्लिम को पांच लाख रुपये देने की घोषणा की गई थी। हालांकि बाद में चौतरफा आलोचना के चलते आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस योजना को टाल दिया था।

दूसरी ओर, रिपोर्ट के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने इस पर सख्त रवैया अख्तियार किया। विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर एक बयान जारी करके रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया। बयान में कहा गया कि ऐसा लगता है कि यह रिपोर्ट भारत, इसके संविधान और समाज के बारे में सतही जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।

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