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वादे-हकीकत के बीच मोदी के 'अच्छे दिन'!

Fri, 15 Aug 2014 11:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 15 Aug 2014 11:29 AM IST
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Modi government between promises and reality

लोकसभा चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कांग्रेस को दिए 60 सालों के बदले में सिर्फ 60 महीनों की मांग की थी। देश की जनता ने उन्हें ये 60 महीने दिए, वो भी पूर्ण बहुमत के साथ।

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मोदी सरकार के शुरुआती 80 दिनों के कार्यकाल पर अगर एक नजर दौड़ाएं तो लगता है कि उनके दावे हवा हवाई नहीं थे। पहले 80 दिनों में ऐसी बहुत सी पहल हुईं, जिनका देश को लंबे समय से इंतजार था।
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रक्षा क्षेत्र में 49 फीसदी एफडीआई हो या फिर गंगा को स्वच्छ करने के लिए विशेष योजना। कई मोर्चों पर मोदी सरकार ने देशवासियों को उम्मीद की एक किरण दिखाई है।
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मोदी सरकार की उपलब्धियां

Modi government between promises and reality

- न्यायाधीश नियुक्ति आयोग बिल पारित
- रक्षा क्षेत्र में 49 फीसदी एपडीआई को मंजूरी
- गंगा की सफाई : इस प्रोजेक्ट के लिए 2037 करोड़ रुपये आवंटित
- 100 नए शहर : 100 स्मार्ट सिटी के लिए 7060 करोड़
- नदियों को आपस में जोड़ना: संबंधित विभाग से रोडमैप बनाने के लिए कहा
- 2019 तक स्वच्छ भारत का सपना: राज्यों से रोडमैप मांगा, पीएमओ ने मंगाया प्रस्ताव
- हर राज्य में आईआईटी, आईआईएम और एम्स: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर साल आईआईटी, आईआईएम और एम्स का एलान
- बुलेट ट्रेन: रेल बजट में घोषणा हुई। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मुंबई-अहमदाबाद रूट पर चलेगी
- सबके लिए घर: ग्रामीण आवास योजना के लिए 8000 करोड़ रुपये। वित्त मंत्री ने कहा 2022 तक सबके लिए घर का लक्ष्य
- कश्मीरी पंडितों की वापसी: पुनर्वास के लिए 500 करोड़ का पैकेज
- देश भर में गैस ग्रिड: 15000 किमी गैस पाइपलाइन बनाने की घोषणा, 9000 किमी प्रोजेक्ट पर काम जारी
- प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के नेताओं को आमंत्रित कर एक नई पहल की शुरुआत
- मंत्रालय और सरकारी विभागों के वर्क कल्चर में बदलाव, समय की पाबंदी पर जोर
- काले धन को वापस लाने के लिए एसआईटी का गठन
- ब्रिक्स बैंक बना हकीकत, पहला अध्यक्ष भारत से, डब्लूटीओ में पक्ष मजबूती से रखा
- इराक में अगवा भारतीय नर्सों की वतन वापसी
- टैक्स को कम करने की कोशिश, बचत को बढ़ावा
- जनता के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए ‘माईजीओवी’ पोर्टल लांच
- रक्षा और इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई की सीमा बढ़ा कर 49 फीसदी
- यूपीए सरकार की योजना मनरेगा को जारी रखने का फैसला
- बिजनेस को आसान बनाने के लिए उठाए गए कई कदम
- प्याज के बढ़े दामों पर काबू पाने के लिए फौरी एक्शन, खाद्य पदार्थों को बढ़े दामों को कम करने के लिए कई कदम उठाए

कहां हुई चूक?

Modi government between promises and reality

- बजट में किसी बड़े सुधार का ऐलान नहीं
- भूमि अधिग्रहण कानून, लेबर पॉलिसी में सुधार नहीं
- न्यायिक नियुक्ति पर न्यायपालिका के साथ टकराव
- यूपीए सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपालों को हटाने पर विवाद
- पीएम के प्रमुख सचिव की नियुक्ति के लिए कानून में बदलाव
- मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की योग्यता पर विवाद
- सरकारी कामकाज में हिंदी को बढ़ावा देने पर विवाद
- नेताओं की बेतुकी बयानबाजी पर लगाम लगाने पर नाकाम

जब मोदी ने दी थी पीएम को चुनौती

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स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री के लालकिले से दिए गए भाषण के मुकाबले में कोई नेता देश को अलग से संबोधित करे, ऐसी मिसाल कम ही मिलती है।

लेकिन देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त के मौके पर तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को चुनौती देते हुए कहा था कि देश दो भाषण सुनेगा। एक तरफ वादे ही वादे होंगे तो दूसरी तरफ उन कामों का जिक्र होगा जो किए जा चुके हैं। एक तरफ निराशा झलकेगी तो दूसरी तरफ आशा की किरण दिखाई देगी।

मोदी ने भुज के लालन कॉलेज में दिए अपने भाषण में जो तेवर दिखाए उनसे साफ हो गया था कि वह नई जिम्मेदारी के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।

ऐसे थे मोदी के तेवर

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- भ्रष्टाचार अपनी जड़े जमा चुका है और केंद्र सरकार भाईभतीजावाद से ग्रस्त है।
- मनमोहन सिंह ने सिर्फ समस्या गिनाईं, यह नहीं बताया कि दशकों सरकार में रहने के बाद आखिर किया क्या?
- विकास के मुद्दे पर खुली चुनौती, कहा गुजरात से कर लें तुलना।
-  पाकिस्तान और चीन की हिमाकत पर मनमोहन चुप क्यों?
- प्रधानमंत्री के भाषण में सिर्फ नेहरू गांधी परिवार का जिक्र, दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों को भूले।
- फूड सिक्योरिटी बिल पर सरकार चर्चा को तैयार नहीं, गरीबों की थाली में सरकार एसिड छिड़क रही है।
- देश तो आजाद हो गया लेकिन गुलामी की मानसिकता से आजादी अभी बाकी है।

जब आडवाणी ने किया किनारा

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नरेंद्र मोदी के लालन कॉलेज से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर हमला करने के मुद्दे पर जहां पूरी भाजपा मोदी के साथ थी।

वहीं इस मामले पर मोदी की आलोचना करने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर पार्टी में अलग-थलग पड़ गए थे। पार्टी का कहना था कि प्रधानमंत्री का लालकिले पर दिया गया भाषण कोई धार्मिक प्रवचन नहीं, जिसकी आलोचना न हो सके।

इस पूरे मामले में पार्टी ने आडवाणी से किनारा कर लिया था। वहीं पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने दबी जबान में आडवाणी की आलोचना को सही ठहराते हुए कहा कि अब तक की परंपरा स्वतंत्रता दिवस के बाद ही प्रधानमंत्री के भाषण की आलोचना करने की रही है।

कांग्रेस की बौखलाहट

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स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री की आलोचना से तिलमिलाई कांग्रेस ने मोदी पर चौतरफा हमला बोल दिया था। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने जहां इसे राष्ट्रीय शर्म करार दिया तो वहीं दिग्विजय सिंह ने उन्हें सत्ता का भूखा करार दिया।

बात यहीं तक नहीं रुकी और उस वक्त विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद ने मोदी को कुएं का मेंढक तक कह डाला।

इस मुद्दे पर आडवाणी के साथ खड़े नजर आए दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोदी को लेकर आडवाणी और उनकी राय समान है। कांग्रेस के ही एक अन्य मंत्री ने कहा था कि मोदी घमंड में चूर हैं।

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