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सरकार का यू-टर्न: मनरेगा की करते थे आलोचना, अब गा रहे गुणगान

Mon, 01 Feb 2016 10:05 PM IST
Updated Mon, 01 Feb 2016 10:05 PM IST
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modi government appraised mgnrega scheme

ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के 10 वर्ष मंगलवार को पूरे हो रहे हैं और तत्कालीन संप्रग सरकार द्वारा पेश इस योजना की शुरू में आलोचना करने वाली मोदी सरकार ने इसकी तारीफ करते हुए कहा कि एक दशक में इसकी उपलब्धियां राष्ट्रीय गर्व और उत्सव का विषय हैं।

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अपने बयान में सरकार ने यह दावा भी किया कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान यह कार्यक्रम पटरी पर लौटा है। साथ ही यह घोषणा भी की कि आने वाले वर्षों में सरकार का ध्यान इस कार्यक्रम से जुड़ी प्रक्रियाओं को और सरल और मजबूत बनाने तथा इस योजना को गरीबों के लाभ के लिए सतत परिसंपत्ति के रूप में विकसित करने पर होगा।
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उम्मीद की जा रही है कि मंगलवार को होने वाले मनरेगा सम्मेलन-2016 के मुख्य भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली कुछ नई घोषणाएं कर सकते हैं। मनरेगा के तहत जहां दूसरी तिमाही में 45.88 करोड़ लोगों को रोजगार मिला वहीं तीसरी में 46.10 करोड़ लोगों को इसका लाभ मिला। इस योजना के तहत रोजगार उपलब्ध का यह आंकड़ा पांच वर्षों में सबसे अधिक है।

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मोदी सरकार ने की थी मनरेगा की आलोचना

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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने इस योजना की आलोचना की थी और प्रधानमंत्री ने इसे कांग्रेस के पिछले 60 सालों के दौरान गरीबी समाप्त न कर पाने का ‘जीवंत स्मारक’ कहा था। पिछले साल बजट सत्र में प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘क्या आप यह समझते हैं कि मैं इस योजना को समाप्त कर दूंगा।

मेरा राजनीतिक अनुभव मुझे ऐसा करने की अनुमति नहीं देता। यह पिछले 60 वर्षों में गरीबी से निपटने की आपकी विफलता का जीवंत स्मारक है। पूरे गाजे-बाजे के साथ मैं इस योजना को जारी रखूंगा।’ उल्लेखनीय है कि तत्कालीन संप्रग सरकार ने इस योजना को देश से गरीबी हटाने का ऐतिहासिक कदम बताया था।

राहुल गांधी जाएंगे बंडलापल्ली गांव

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संप्रग सरकार की ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के दस पूरे होने पर कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के बंडलापल्ली गांव का दौरा करेंगे जहां से इस मनरेगा की शुरुआत की गई थी। यहां वह दिहाड़ी मजदूरों, एनजीओ के प्रतिनिधियों और सरपंच से मुलाकात करेंगे और उनके साथ भोजन करेंगे। साल 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने इस योजना की घोषणा की थी।

मनरेगा के तहत सरकार ने किए 3.14 लाख करोड़ खर्च

ग्रामीध विकास मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी बयान के मुताबिक, मनरेगा के मद में शुरुआत से अब तक सरकार ने 3,13,844.55 (लगभग 3.14 करोड़) करोड़ रुपये खर्च किए। इनमें से 71 प्रतिशत का भुगतान मजदूरों को दिहाड़ी के तौर पर किया गया। मजदूरों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी लगातार क्रमश: 20 फीसदी और 17 फीसदी रही है।

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