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किन्नरों को हिजड़ा कहे जाने पर मोदी सरकार नाराज

Wed, 10 Sep 2014 12:31 AM IST
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 10 Sep 2014 12:31 AM IST
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Modi government angry at being called a eunuchs.

किन्नरों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता देने और उन्हें ओबीसी का दर्जा देने के सर्वोच्च अदालत के फैसले में केंद्र सरकार ने कई खोट निकाले हैं। किन्नरों को हिजड़ा कहे जाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सरकार ने सर्वोच्च अदालत से फैसले में संशोधन का आग्रह किया है।

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साथ ही कहा है कि सभी किन्नरों को ओबीसी का दर्जा नहीं दिया जा सकता क्योंकि किन्नर जन्म से दलित और आदिवासी भी हो सकते हैं। ऐसे में ओबीसी का दर्जा देने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश जरूरी है।
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सर्वोच्च अदालत से दायर आवेदन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने कहा है कि हिजड़ा शब्द अपमानजनक है। किन्नर इस शब्द से घृणा करते हैं। ऐसे में इस शब्द का प्रयोग उचित नहीं है।
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फैसले में संशोधन समेत तमाम पहलुओं को स्पष्ट करने की मांग करते हुए आवेदन में सरकार ने कहा है कि विशेषज्ञ समिति ने किन्नरों को लेकर एक रिपोर्ट इस साल 27 जनवरी को पेश की थी।

लेकिन अदालत को इस विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं दी जा सकी। सर्वोच्च अदालत ने फैसले को छह माह में लागू करने का आदेश दिया है, जो संभव नहीं है। इसे कई चरणों में लागू किया जा सकता है।

'पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश जरूरी'

Modi government angry at being called a eunuchs.

केंद्र ने समलैंगिकों को किन्नरों की श्रेणी में रखने पर आपत्ति दर्ज की है। सरकार ने कहा है कि गे और लेस्बियन सेक्सुअल ओरियेंटेशन है। उन्हें किन्नर (ट्रास्जेंडर) नहीं कहा जा सकता।

याद रहे कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 15 अप्रैल के फैसले पर यह आवेदन दायर किया है। अदालत ने किन्नरों को तीसरे वर्ग के रूप में मान्यता देने के लिए सरकार को छह माह का समय दिया था। फैसले के लगभग पांच माह बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कई बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है।

सरकार का तर्क है कि किन्नर किसी जाति के रूप में अपनी पहचान नहीं रखते। बहुत सारे किन्नर जन्म से ही दलित या आदिवासी हो सकते हैं। उन्हें अन्य पिछड़ी जाति का दर्जा कैसे दिया जा सकता है।

सरकार ने इंद्रा साहनी मामले में सर्वोच्च अदालत के फैसले का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता और ओबीसी में वर्गों का निर्धारण पिछड़ा वर्ग आयोग करेगा।

फैसले पर सरकार ने की संशोधन की मांग

Modi government angry at being called a eunuchs.

आयोग की सिफारिश स्वीकार करने के लिए सरकार बाध्य है। इसलिए अगर किन्नरों को एक वर्ग के रूप में ओबीसी की मान्यता देनी है तो मामला राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को भेजना होगा। ऐसे में यह निर्धारित करना छह माह में संभव नहीं है।

सरकार ने यह भी कहा है कि हो सकता है किन्नर सामाजिक परिस्थितियों के कारण अपने परिवार से अलग हो गए हों। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने कोई अन्य जाति अपना ली है। जाति जन्म से निर्धारित होती है। उन्हें एक वर्ग के रूप में ओबीसी के रूप में मान्यता देना राजनीतिक रूप से समस्या पैदा कर सकता है।

गैर दलितों को ओबीसी का दर्जा प्रदान करना कठिन नहीं है। लेकिन एससी और एसटी किन्नरों को ओबीसी का दर्जा देना व्यावहारिक नहीं है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में किन्नरों को तीसरे लिंग के रूप में कानूनी मान्यता प्रदान कर दी थी।

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