मोदी सरकार के 30 दिन, कुछ खट्टे-कुछ मीठे
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अच्छे दिन लौटाने के वादे के साथ केंद्र की सत्ता में आई मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले 30 दिन में आम लोगों को कड़े फैसले की कड़वी दवा दी है। इस छोटी अवधि में सरकार विवादों और चुनौतियों के बीच लगातार चर्चा में बनी रही।
इराक संकट ने जहां बाहरी मोर्चे पर सरकार की अग्नि परीक्षा की शुरुआत की। वहीं महंगाई के और विकराल हो जाने से सरकार को घरेलू मोर्चे पर भी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।
इस दौरान सुस्त दिखने वाली देश की शीर्ष नौकरशाही नई सरकार के तेवरों से हलकान जरूर नजर आई। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार चलाने की अपनी शैली के कारण सरकार के मंत्री की जगह खुद मोदी ही केवल सर्वाधिक चर्चा में रहे, बल्कि जनता से संवाद करने में भी मंत्री बहुत पीछे दिखे।
पड़ोसी देशों से रिश्ते
हां, शपथ ग्रहण के दौरान सार्क देशों के शासनाध्यक्षों को बुलाने के बाद पहली विदेश यात्रा के लिए भूटान को चुन कर प्रधानमंत्री ने पड़ोसी देशों से बेहतर संबंध बनाने का साफ संदेश देकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।
इसी दौरान वीजा विवाद के कारण अमेरिका से खुद का मधुर रिश्ता न होने के बावजूद प्रधानमंत्री ने अमेरिका जाने का कार्यक्रम तय कर सबको चौंकाया।
खास बात यह रही है कि आम चुनाव के दौरान करीब चार महीने तक लगातार यात्रा करने वाले मोदी अपने पहले 30 दिन के कार्यकाल में एक बार भूटान की यात्रा की तो दूसरी बार गोवा जा कर आईएनएस विक्रमादित्य को राष्ट्र को समर्पित किया।
मोदी की कड़वी गोली
अच्छे दिन लाने के वादे के साथ अपने पहले 30 दिन के कार्यकाल में आम लोगों को कई कड़वी गोली देने के साथ ही मोदी सरकार की कई नई चुनौतियों से पाला पड़ा।
मसलन महंगाई पहले की तुलना में और बढ़ी तो इस बीच रेल यात्री किराया और माल भाड़ा बढ़ाने का निर्णय कर नई सरकार ने साफ संकेत दिया कि फिलहाल महंगाई की मार से बचाने की कोई तात्कालिक दवा उसके पास नहीं है। इसी दौरान मोदी सरकार को विदेशी मोर्चे पर इराक संकट के कारण अचानक आई चुनौती का सामना करना पड़ा।
मोदी के लिए बड़ी चुनौती
इस मामले में जहां नई सरकार के सामने इराक से अपने नागरिकों को बाहर निकालने की चुनौती है तो दूसरी ओर हिंसा जारी रहने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में छलांग मार रही कच्चे तेल की कीमत के कारण घरेलू मोर्चे पर भी सरकार का संकट बढ़ा है।
इसी दौरान डीयू में चार वर्षीय अंडर ग्रेजुएट कोर्स, पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने में पेंच फंसाने, राजस्थान कोटे के मंत्री के यौन उत्पीड़न मामले में घिरने और राज्य मंत्री वीके सिंह का भावी सेना प्रमुख के खिलाफ बयानबाजी करने के मामले में सरकार विवादों में घिरी।
नई सरकार के पहले 30 दिन में नौकरशाही के रवैये में आए बदलाव को साफ महसूस किया जा सकता है। नौकरशाही पहले से न केवल चौकस है, बल्कि परिणाम न दिखाने पर सजा की संभावना के कारण दहशत में भी है।
मोदी सरकार के महत्वपूर्ण फैसले
22 जून, 2014: मोदी ने अफसरों को भरोसा दिलाया कि आप निर्णय लीजिए हम आपके साथ हैं
20 जून, 2014: मोदी सरकार ने 15 वर्ष में 14.2 प्रतिशत किराया बढ़ाया
18 जून, 2014: भारत-रूस के बीच द्विपक्षीय वार्ता पर सहमति बनी
15 जून, 2014: मोदी ने भूटान दौरे पर द्विपक्षीय संबंधों की मजबूरी पर जोर दिया
10 जून, 2014: मोदी ने यूपीए कार्यकाल की चार कैबिनेट समितियां भंग की
9 जून, 2014: मोदी सरकार ने गंगा नदी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए विशेष अभियान शुरू किया
6 जून, 2014: भाजपा सांसदों को पैर न छूने की नसीहत
29 मई, 2014: स्कूली पाठ्यक्रम में अपनी जीवनी पढ़ाने पर रोक
28 मई, 2014: सभी मंत्रियों को अपने निजी स्टाफ में रिश्तेदारों को नहीं रखने की हिदायत
27 मई, 2014: पहली कैबिनेट ने काले धन पर एसआईटी का गठन किया
सरकारी विभागों में हिंदी में काम करने का निर्णय लिया