केंद्र ने बताई गंगा सफाई की 'हकीकत'
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कड़ी फटकार खाने के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में गंगा की सफाई के लिए उठाए जाने वाले कदमों की रूपरेखा पेश की।
सरकार ने कहा है कि गंगा की सफाई के लिए उसने अल्प, मध्यम और लंबी अवधि वाले कदमों की योजना बनाई है, जिसमें 18 साल का समय लगेगा और कई हजार करोड़ रुपये पवित्र नदी के गौरव को वापस लाने में खर्च होंगे।
एनडीए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि गंगा के किनारे स्थित 118 कस्बों में नदी को प्रदूषण और गंदगी से बचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए पानी के शुद्धिकरण और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट ट्रीटमेंट प्लान लगाने की योजना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के बाद ही सरकार अगला कदम उठाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दिया हलफनामा
हलफनामे में सरकार ने कहा है कि गंगा को पुनर्जीवन प्रदान करने के लिए एक्शन प्लान को तीन समयबद्ध चरणों में रखा गया है। इसमें पहला चरण अल्प अवधि का है जो अधिकतम तीन साल, वहीं मध्यम अवधि पांच साल की और लंबी अवधि की योजना उसके अगले दस साल या उससे अधिक समय में पूरी की जाएगी।
इसमें कहा गया है कि गंगा के लिए बनी योजना में संबंधित पांच राज्यों से विचार-विमर्श व परामर्श किया गया। जो गंगा बेसिन राज्यों में शामिल हैं। ये राज्य प्राथमिक तौर पर गंगा को पुनर्जीवन देने की योजनाओं को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं, जो 2500 किलोमीटर लंबी नदी की सफाई के लिए केंद्र की ओर से बनाई गई हैं।
केंद्र ने कहा है कि पहले चरण में 118 कस्बों की संभावित तौर पर पहचान की गई है। जहां हर हाल में नदी के पानी में मिलने वाले प्रदूषण और गंदगी से बचाव के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा। इसके लिए वाटर वेस्ट ट्रीटमेंट और सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लान भी शामिल हैं।
सात रिवर फ्रंट पर विशेष ध्यान
जल संसाधन मंत्रालय ने कहा है कि इसके साथ ही सात रिवर फ्रंट क्षेत्रों में घाटों के विकास के लिए चुना गया है, इसमें केदारनाथ, हरिद्वार, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद, पटना और दिल्ली शामिल हैं।
मध्यम अवधि के लक्ष्य पर सरकार ने कहा है कि 118 शहरी स्थानों को संभावित तौर पर चिन्हित किया गया है, जहां पर सीवेज संबंधी ढांचागत सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी और पूरी तरह से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नदी में किसी भी हाल में गंदगी नहीं जा सके।
इसकी अनुमानित लागत करीब 51000 करोड़ रुपये आएगी और गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए नदी के समीप स्थित गांवों की 1649 ग्राम पंचायतों के लिए इस सुविधा को पूरी तरह नि:शुल्क रखा गया है।
सरकार ने हलफनामे में लंबी अवधि की योजना का उल्लेख करते हुए कहा है कि गंगा नदी बेसिन प्रबंधन योजना को सात आईआईटी के समूह की ओर से तैयार किया गया है। ताकि गंगा की धारा को निर्मल, अविरल और बहाव को बरकरार रखा जाना सुनिश्चित किया जा सके।
केंद्र ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पेश किया है। सरकार ने कहा कि गंगा को स्वच्छ बनाने के कार्य में एनआरआई समेत हर वर्ग क्षेत्र के लोगों की मदद ली जाएगी।