मोदी ने इस बार भगत सिंह पर की गलती
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भाषण शैली कितनी आक्रामक हैं, इससे हम सभी वाकिफ हैं। लेकिन इसी आक्रामकता की आंधी में वह कई बार तथ्यों के साथ ऐसा खिलवाड़ करते हैं कि बाद में जवाब देना मुश्किल हो जाता है।
मोदी के भाषण में गलतियों की शुरुआत बिहार रैली से मानी जाती है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी के इतिहास ज्ञान पर तंज कसते हुए उनके भाषण की खामियों को रेखांकित किया था।
लेकिन ऐसा लगता है कि खूब छीछालेदर होने के बावजूद नरेंद्र मोदी ने कोई सबक नहीं लिया। एक तरफ वह प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं, लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों और कहानियों को लेकर बार-बार चूक कर रहे हैं। ताजा मामला महान क्रांतिकारी भगत सिंह से जुड़ा है।
भगत नहीं, सावरकर रहे थे अंडमान में
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर तथ्यों को पूरी तरह मिटा दिया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह ने लंबा वक्त अंडमान निकोबार द्वीप समूह में गुजारा था।
हालांकि, हकीकत यह है कि वो वीर सावरकर थे, जिन्होंने अंडमान की जेलों में लंबा वक्त काटा। भगत सिंह और उनके दोस्तों को दिल्ली के आसपास के जेलों में रखा गया था।
8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली की सेंट्रल लेजिसलेटिव असेंबली से गिरफ्तार करने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को पहले दिल्ली में रखा गया था। बाद में उन्हें मियांवली की जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
दिल्ली, मियांवली में रखा गया था भगत सिंह को
लंबे वक्त तक चली सुनवाई के बाद भगत सिंह, राजगुरु और दूसरे क्रांतिकारियों को लाहौर षडयंत्र मामले में सजा-ए-मौत सुनाई गई और मार्च 1931 में लाहौर जेल में फांसी दे दी गई।
मोदी बुधवार को गांधीनगर में ई-नगर के उद्घाटन समारोह में आजादी के 75 साल बाद 2022 को लेकर भारत का विजन बता रहे थे, जब उनसे यह गलती हुई।
मोदी ने दावा किया कि आजादी की लड़ाई में अपनी जान कुर्बान करने वाले इन क्रांतिकारियों - भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने अंडमान जेल में वक्त गुजारा था।
पहले भी करते रहे हे हैं ऐसी गलतियां
नरेंद्र मोदी ने कहा, "भगत सिंह और उनके दोस्तों का जिक्र तक हमारे रोंगटे खड़े कर देता है। इन लोगों को फांसी क्यों लगी? उन्होंने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में वक्त क्यों गुजारा?"
हालिया अतीत में गुजरात के मुख्यमंत्री से ऐतिहासिक मोर्चे पर और भी गलतियां हुई हैं। पिछले साल नवंबर में उन्होंने कांग्रेस पर जन संघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अस्थियां न लाने के लिए हमला बोला था।
दरअसल, वो कहना चाहते थे कि कांग्रेस स्वतंत्रता सेनानी श्यामाजी कृष्णा वर्मा की अस्थियां नहीं लाई। लेकिन वह दोनों नामों के बीच कनफ्यूज कर गए और कांग्रेस को पलटवार का मौका मिल गया।