मोदी को लगा गुजरात हाईकोर्ट से झटका
गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य के निकाय चुनावों में मतदान को अनिवार्य किए जाने संबंधी कानून को लागू करने पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा कि ‘मतदान का अधिकार’ अपने आप में मतदान से अलग रहने का भी अधिकार देता है।
ऐसे में इसे ‘मतदान का कर्त्तव्य’ के रूप में नहीं बदला जा सकता। अदालत गुजरात स्थानीय प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम - 2009, जिसमें मतदान को अनिवार्य किया गया था, को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
मोदी लाए थे बिल
इस महीने की शुरुआत में सरकार ने अधिसूचना जारी कर कहा था कि कानून के
अनुसार मतदान नहीं करने वाले को 100 रुपये जुर्माना देना होगा।
स्थानीय
निकाय चुनावों में नागरिकों के लिए मतदान को अनिवार्य बनाने वाले बिल को
तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखा था और राज्य विधानसभा ने इस बिल
को पास किया था। वर्तमान गवर्नर ओपी कोहली के हस्ताक्षर करने के बाद 2009
में यह कानून बन गया था।