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'कांग्रेस मुक्त भारत', मोदी के 2 और कदम!

Fri, 10 Oct 2014 07:40 PM IST
Updated Fri, 10 Oct 2014 07:40 PM IST
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महाराष्ट्र और हरियाणा में अगले सप्ताह विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूरी कोशिश है कि भाजपा को दोनों राज्यों में बहुमत हासिल हो। वे ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां कर रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस पर हार का संकट मंडरा रहा है।

इन दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम भारतीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम साबित होने वाले हैं।

नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था। जाहिर है कि वे कांग्रेस को समाप्त कर ही दम लेना चाहते थे।

कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हो गई और लोकसभा चुनाव में उसे कुल सीटों की दस फ़ीसदी सीट भी हासिल नहीं हुई।

इसके बावजूद अब भी देश के 11 राज्यों में कांग्रेस पार्टी सत्ता में है। इनमें अरुणाचल प्रदेश, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और उत्तराखंड शामिल हैं। बीते साल कांग्रेस दिल्ली, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में सत्ता से बाहर हुई थी।
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कांग्रेस जिन राज्यों में सत्ता में हैं, उनमें पांच उत्तर पूर्व के कम आबादी वाले राज्य हैं। हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और केरल अहम राज्य हैं। इनमें से हरियाणा और महाराष्ट्र में अगले हफ्ते चुनाव हो रहे हैं।
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अब तक महाराष्ट्र में मोदी दो दर्जन चुनावी रैलियों को संबोधित कर चुके हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इसी दौरान केवल दो चुनावी रैली में नजर आए हैं।

कांग्रेस की हार के संकेत

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टीवी चैनलों पर दिखाए जा रहे चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों से कौन चुनाव जीत रहा है, इसकी साफ़ तस्वीर नहीं मिल रही है, लेकिन कांग्रेस की हार पर सब सहमत दिख रहे हैं।

इंडिया टीवी- सी वोटर के चुनावी सर्वेक्षण के मुताबिक़ महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरेगी। उसे राज्य के 288 विधानसभा सीटों में 93 सीटें मिलने का अनुमान है।

शिवसेना 59 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर आ सकती है। शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 47 सीटें मिलने का अनुमान है जबकि कांग्रेस को 40 सीटें मिल सकती हैं।

एबीपी न्यूज़- नीलसन के सर्वेक्षण के मुताबिक़ भारतीय जनता पार्टी को 112 सीटें हासिल हो सकती हैं। शिवसेना को 62 सीटें मिलने का अनुमान है। इस सर्वेक्षण ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 38 और कांग्रेस को 45 सीटें दी हैं।

मिंट समाचार पत्र की रिपोर्ट में कहा गया है, "प्रधानमंत्री मोदी की लहर पर सवार हो भाजपा पहली बार राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरेगी लेकिन बहुमत नहीं हासिल कर पाएगी।"

ज़ी न्यूज़ के सर्वेक्षण के मुताबिक़ भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरेगी। दूसरे नंबर पर कांग्रेस और तीसरे नंबर पर शिवसेना के रहने का अनुमान है।

मुश्किल में शिवसेना

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ज़ी न्यूज़ के आकलन के मुताबिक़ भाजपा को 90 सीटें, कांग्रेस को 72 और शिवसेना को 61 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 38 सीटें मिलने का अनुमान है।

इससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब कोई गठबंधन टूटता है तो मतदाताओं का रूझान गठबंधन में शामिल उस मज़बूत पार्टी की ओर बढ़ता है, जिसकी राष्ट्रीय हैसियत हो।

हालांकि शिवसेना दावा कर रही है कि राज्य में उसकी स्थिति भाजपा से मज़बूत है लेकिन नरेंद्र मोदी के करिश्मे की के सामने उद्धव ठाकरे फीके पड़ते दिख रहे हैं।

90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा को लेकर एक चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के मुताबिक़ भाजपा को सबसे ज़्यादा 33 सीटें मिल सकती हैं। राज्य में बीते 10 सालों से सत्ता में रही कांग्रेस के 16 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रहने का अनुमान है।

ये भी संभव है कि हरियाणा में भाजपा को बहुमत हासिल हो जाए, आख़िरकार कुछ महीने पहले हुए आम चुनाव के दौरान राज्य की 10 लोकसभा सीटों में सात सीटें भाजपा को हासिल हुई थीं।

सीटों में जो भी अंतर हो, इन दो राज्यों में हार से कांग्रेस को ज़ोरदार झटका लगेगा। पार्टी का आधार तो सिकुड़ेगा ही साथ में महाराष्ट्र में हारने से राजनीतिक चंदे में भारी कमी आएगी।

कांग्रेस अब तक महाराष्ट्र में केवल एक ही बार 1995 में चुनाव हारी है।

भाजपा का भरोसा

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महाराष्ट्र में कांग्रेस बेहद मज़बूत रही है और यहां उसके पास अनुभवी नेताओं की फ़ौज भी मौजूद है।

अगर मोदी कांग्रेस का यहां भी सफाया कर देते हैं तो ये गांधी परिवार के लिए शर्मनाक होगा। ख़ासकर राहुल गांधी के लिए। राहुल इन हारों को भले हल्के में लेते रहे हों लेकिन ये पार्टी के लिए वास्तविकता में घातक साबित हो रहे हैं।

पिछले कुछ सालों में, भाजपा ने राज्य के अपने दो वरिष्ठ नेताओं को खोया है। ये दोनों ऐसे नेता थे, जिन्होंने राज्य में पार्टी को खड़ा किया था। पहले प्रमोद महाजन को उनके भाई ने ही गोली मार दी। इसके बाद महाजन के बहनोई गोपीनाथ मुंडे की इसी साल सड़क हादसे में मौत हो गई।

इन दो नेताओं को खोने के बावजूद भाजपा ने राज्य में ख़ुद को मज़बूत किया। इससे उपजे भरोसे के चलते ही पार्टी ने शिवसेना के साथ 25 साल पुराने गठबंधन को तोड़ने का फ़ैसला लिया।

मेरा अनुमान है कि गठबंधन के टूटने से शिवसेना को बहुत ज़्यादा नुकसान होगा और पार्टी राज्य में धीरे धीरे अप्रासंगिक हो सकती है। ठाकरे और भाजपा ने बीते 25 सालों के दौरान अजीब गठजोड़ किया हुआ था, कई विश्लेषकों की नज़र में ये बेमानी था।

भाजपा महाराष्ट्र में लोकसभा की ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ती और शिवसेना को विधानसभा में ज्यादा सीटें मिलतीं। यह भी तब जब भाजपा प्रत्येक 10 में से 4।5 सीटों पर चुनाव जीतती रही और शिवसेना प्रत्येक 10 में से केवल 3।

मोदी के दो कदम

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इससे साफ़ होता है कि कौन सी पार्टी मज़बूत थी। लेकिन बाल ठाकरे का करिश्मा और प्रमोद महाजन की दिल्ली पर नज़र होने से शिवसेना भाजपा की कीमत पर फ़ायदा उठाती रही। अब ये नहीं होगा।

शिवसेना पारंपरिक पार्टी नहीं है, ना ही इसका कोई चुनावी घोषणापत्र है। यह प्रतिक्रियात्मक राजनीति में यकीन रखने वाली पार्टी है।

इसके नेता पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की भारत दौरे जैसे अप्रासंगिक मुद्दों पर सबसे ज़्यादा सक्रियता दिखाते रहे हैं। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक (इसका मुख्यालय महाराष्ट्र में ही है) के बिना शिवसेना कुम्हला जाएगी।

महाराष्ट्र में कांग्रेस की हार से नरेंद्र मोदी को चुनौती देने वाली गांधी परिवार की रणनीति के ख़िलाफ़ आवाज़ तेज होंगी। कांग्रेस ने अब तक संघर्ष का दमखम नहीं दिखाया है और ना ही उनमें मोदी जैसी भूख नजर आई है।

अगर महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस की हार होती है तो प्रधानमंत्री मोदी 'कांग्रेस मुक्त भारत' के अपने मिशन की ओर दो कदम और बढ़ाएंगे।

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