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पटेल पर मोदी का दावा फुस्स उल्टे NDA पर सवाल

Fri, 01 Nov 2013 03:13 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 01 Nov 2013 03:13 PM IST
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modi claim on expense over patel wrong, proves record

भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी का कहना है कि वह आजकल जो भी कहते हैं, उसे पीएम की टीम और उनके बॉस की टीम हमेशा सुनती है। जाहिर है, इन दिनों देश भी उन्हें गौर से सुन रहा है।

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और इसी वजह से उनके बयानों का पोस्टमार्टम होना स्वाभाविक है। गुरुवार को उन्होंने दावा किया था कि यूपीए इस साल तक सरदार पटेल को भूल गई थी, लेकिन इस दावे में दम नहीं दिखता।
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सरकार की पब्लिसिटी इकाई डीएवीपी ने बीते चार साल में सरदार पटेल की जयंती पर विज्ञापनों पर करीब 8.5 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। संयोग से इस मामले में उंगली एनडीए सरकार पर उठ सकती है।
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1999 से 2004 तक चले अपने कार्यकाल में एनडीए सरकार ने दो साल (2001 और 2002) पटेल के लिए कोई विज्ञापन जारी नहीं किया।

मोदी ने गुरुवार को कहा था, "सरदार पटेल की पिछली जयंतियों पर कोई विज्ञापन नहीं दिखते थे। आज देश भर के अखबार में सरदार साहब पर विज्ञापन हैं...यह गुजरात इफेक्ट है।"

मोदी के आरोपों के बारे में पूछने पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा, "अब यह जाहिर हो चुका है कि हाल में भाजपा के पीएम दावेदार बने मोदी गलतफहमियों का प्रचार करते वक्त तथ्यों को बीच में नहीं आने देते।"


यूपीए ने 2008 में विज्ञापन नहीं दिया था और तिवारी का कहना है कि इसकी एक वजह उस साल जारी आर्थिक मंदी हो सकती है।

हालांकि, यूपीए ने पटेल पर जो खर्च किया, वह नेहरू-गांधी परिवार के जयंती और पुण्यतिथि की तुलना में कुछ भी नहीं। डीएवीपी ने महात्मा गांधी पर 33 करोड़, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर 21 करोड़, इंदिरा गांधी पर 14.5 करोड़ रुपए और जवाहरलाल नेहरू पर 9.38 करोड़ रुपए खर्च किए।

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