फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   modi bharat swach abhiyan in varanasi.

मोदी ने जहां फावड़ा चलाया वहीं तक सिमटा स्वच्छता अभियान

Fri, 06 Feb 2015 08:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 06 Feb 2015 08:42 AM IST
विज्ञापन
modi bharat swach abhiyan in varanasi.

चार महीने की लंबी मशक्कत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अस्सी घाट की सफाई की मुहिम अब अंतिम दौर में है। आखिरी प्लेटफार्म से सिल्ट हफ्ते भर में हटा ली जाएगी। इसके लिए पानी में पांच फीट नीचे से मिट्टी निकाली जा रही है, ताकि घाट से नौकायन में पर्यटकों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

विज्ञापन


फिलहाल नावें अब इस घाट पर लगने लगी हैं लेकिन इसके दक्षिणी हिस्से वाले घाट पर सौ मीटर से अधिक एरिया में सिल्ट के वर्षों पुराने ढेर अब भी मुंह चिढ़ा रहे हैं। उत्तरी तरफ गंगा महल और रीवा घाट को गोद लेने वाली समितियों ने भी काम शुरू नहीं किया है।
विज्ञापन


ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी का स्वच्छता अभियान काशी में सिर्फ अस्सी घाट तक सिमटा नजर आने लगा है। आठ नवंबर, 2014 को पीएम ने फावड़ा चलाकर इस घाट से स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

दूसरे घाटों की हालत खराब

modi bharat swach abhiyan in varanasi.

काशी में स्वच्छता अभियान सही मायने में अभी तक अस्सी घाट से आगे नहीं बढ़ सका है। कुछ घाटों पर झाड़ू लगवाने, डस्टबिन रखवाने और गंगा में विसर्जित फूलमाला उठवाने को छोड़ दिया जाए तो वर्षों से पड़ी बाढ़ की सिल्ट अभी सिर्फ अस्सी से ही हटाई जा रही है।

सुलभ इंटरनेशनल के राष्ट्रीय सलाहकार बीएन चतुर्वेदी के मुताबिक हफ्ते भर में अस्सी घाट से मिट्टी पूरी तरह से हटा ली जाएगी। आखिरी प्लेटफार्म पर पांच फीट गहरे पानी से सिल्ट निकाली जा रही है, इसलिए समय लग रहा है। अस्सी घाट के दोनों तरफ पड़ी सिल्ट के की सफाई के बारे पूछने पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई। अस्सी से संत रविदास घाट के बीच के हिस्से को सफाई के लिए गायत्री परिवार ने गोद लिया है लेकिन अभी तक इस संस्था की ओर से काम शुरू ही नहीं कराया जा सका है। तुलसी घाट से लगे रीवा घाट की सफाई के लिए पंजाब नेशनल बैंक को जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन वहां भी सिल्ट के ढेर जस के तस पड़े हैं।

तीर्थपुरोहित बलराम मिश्र का कहना है कि सिर्फ अस्सी घाट की सफाई से स्वच्छता अभियान की कामयाबी का डंका नहीं पीटना चाहिए। दूसरे घाटों की हालत वैसी ही है जैसे पहले थी। भदैनी के पार्षद गोविंद शर्मा का कहना है कि जब तक सभी घाटों से सिल्ट नहीं हटेगी, तब तक स्वच्छता अभियान की कामयाबी साबित नहीं हो सकती।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed