भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर मोदी ने खुद संभाला मोर्चा
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सरकार के लिए गले की फांस बन चुके भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर हालात संभालने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे आकर मोर्चा संभालना पड़ा है। उन्होंने बुधवार को वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की।
पीएम ने मंत्रियों को विपक्ष के साथ ही असंतुष्ट सहयोगी दलों से बातचीत कर मौजूदा बिल के प्रावधानों के बारे में समझाने और उनके सुझावों को एकत्रित करने का निर्देश दिया। सरकार की रणनीति कारगर सुझावों को शामिल कर बिल के कुछ प्रावधानों में बदलाव करने की है। हालांकि मोदी आर्थिक सुधारों का सख्त संदेश देने के लिए बिल में ज्यादा बदलाव किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं भाजपा ने भी अपनी गठित समिति के माध्यम से किसान संगठनों से बातचीत की शुरुआत कर इस प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है।
मोदी ने राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, मुख्तार अब्बास नकवी, राजीव प्रताप रूडी और निर्मला सीतारमण के साथ अध्यादेश पर चर्चा की। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री का मानना था कि अध्यादेश के बारे में सकारात्मक तथ्यों की जगह नकारात्मक तथ्यों को ज्यादा प्रचारित किया गया है। उन्होंने मंत्रियों से विपक्ष के साथ ही असंतुष्ट सहयोगी दलों के साथ बातचीत करने और उनके सुझाव लेने को कहा है।
हालांकि प्रधानमंत्री ने बैठक में यह भी साफ कर दिया कि वह बिल में ज्यादा बदलाव के पक्ष में नहीं हैं। बैठक में शामिल रहे एक मंत्री ने बताया कि पीएम मोदी बिल के विवादास्पद प्रावधानों पर पुनर्विचार के लिए हर तरह के सुझाव जानना चाहते हैं।
डैमेज कंट्रोल को मोर्चे पर उतरे केंद्रीय मंत्री
भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर घिरी मोदी सरकार अब डैमेज कंट्रोल में जुटी गई है। इसके लिए सरकार ने अपने केंद्रीय मंत्रियों को मैदान में उतार दिया है। मंत्रियों को अध्यादेश के सकारात्मक पहलुओं से जनता को अवगत कराने को कहा गया है। साथ ही विपक्ष के दुष्प्रचार का पर्दाफाश करने का भी निर्देश दिया गया है। इसी कड़ी में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को भूमि अधिग्रहण बिल पर विपक्ष के दोहरे मानदंड को लेकर हमला बोला और उस पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।
भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर फैल रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए सरकार की ओर से मोर्चे पर उतरे गडकरी ने अध्यादेश को किसान हितैषी करार दिया। उन्होंने इसे देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण करार दिया। विपक्ष पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साल जुलाई में बुलाई गई बैठक में तमाम गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों ने यूपीए के 2013 के विधेयक को नकारा बताते हुए बदलाव की मांग की थी। उन्होंने कहा कि जिन सियासी दलों की सरकारों ने नए कानून की मांग की थी, वे ही अब विरोध कर रहे हैं। परिवहन मंत्री ने कहा कि वर्तमान अध्यादेश किसान विरोधी नहीं है। उन्होंने विपक्ष से लेकर मीडिया और विचारकों को भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर खुली बहस करने की चुनौती दी।
तर्कों के साथ अन्ना हजारे होंगे निशाने पर
भूमि अधिग्रहण बिल का विरोध कर रहे समाजसेवी अन्ना हजारे भाजपा के निशाने पर हैं। उन पर विदेशी ताकतों से हाथ मिलाने और विकास विरोधी शक्तियों से जुड़ने का आरोप लगाया जा रहा है। भाजपा समर्थक समाजसेवी अन्ना से सवाल दाग रहे हैं। पार्टी तर्कों के साथ अन्ना के जमीन बचाओ आंदोलन को सवालों के कठघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रही है।