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जब मोदी ने पूछा, 'सबके नाम लूं या अपने आप खड़े होंगे'

Wed, 18 Mar 2015 11:12 AM IST
Updated Wed, 18 Mar 2015 11:12 AM IST
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भाजपा संसदीय दल की बैठक में मंगलवार को उन 24 मंत्रियों और सांसदों को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी जो पिछले हफ्ते भूमि अधिग्रहण बिल पर मतदान के दौरान लोकसभा से गायब थे।

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बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूची निकाल कर कुछ सांसदों के नाम पढ़ने के बाद कहा कि सारे नाम लूं या अनुपस्थित रहने वाले खुद खड़े होंगे। इसके बाद गैर हाजिर रहे मंत्री और सांसद अपनी जगह पर खड़े हो गए और गैर मौजूदगी की वजह बताई।
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बताते हैं कि मध्य प्रदेश की एक सांसद ने जब पंचायत चुनाव में व्यस्तता को कारण बताया तो जवाब मिला कि संबंधित सांसद फिर पंचायत की ही राजनीति करें। अनुपस्थित रहने वाले सांसदों में बाबुल सुप्रियो, शत्रुघ्न सिन्हा, वरुण गांधी, पूनम महाजन, प्रीतम मुंडे, राजेंद्र अग्रवाल का भी नाम था।
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मोदी ने सांसदों-मंत्रियों को खड़ा कर किया जवाब-तलब

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बैठक में दो अन्य मंत्रियों को भी सफाई देनी पड़ी। इनमें से एक मंत्री उस दौरान राज्यसभा में तो दूसरे विदेश दौरे पर थे। जवाब तलब करने के बाद प्रधानमंत्री और संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने सांसदों को भविष्य में सदन में हर हाल में मौजूद रहने की अंतिम चेतावनी दी।

संसदीय दल की बैठक में शामिल एक सांसद के मुताबिक, पीएम मोदी गैरहाजिर रहने वाले सांसदों और मंत्रियों से बेहद खफा नजर आए। बैठक शुरू होते ही उन्होंने भूमि बिल पर वोटिंग के दौरान गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताई। इसके बाद उन्होंने अनुपस्थित लोगों की सूची पढ़नी शुरू कर दी।

कुछ नाम पढ़ने के बाद पीएम ने पूछा कि ऐसे लोग खुद खड़े होंगे या पूरी सूची पढ़नी होगी। बाद में इस पूरे मामले में नायडू ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि सदस्यों को यह पता होना चाहिए कि उनकी अनुपस्थिति से सदन में सरकार की किरकिरी हो सकती है।

सांसदों की लगेगी कार्यशाला

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बैठक में पीएम की तीन देशों की हालिया यात्रा और उसकी उपलब्धियों का जिक्र किया गया। नायडू ने कहा कि राहुल गांधी की कथित जासूसी सहित अन्य मुद्दों को हवा देने के कारण खुद कांग्रेस की विश्वसनीयता संदिग्ध हुई है।

बजट सत्र के दूसरे चरण के एक दिन पहले 19 अप्रैल को भाजपा सांसदों की कार्यशाला लगेगी। कार्यशाला में सांसदों को केंद्रीय योजनाओं को अपने अपने क्षेत्रों में लागू कराने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

सांसदों को केंद्रीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के तरीके से भी अवगत कराया जाएगा। सांसदों की कार्यशाला के बाद इनके निजी सचिवों की 20 और 21 अप्रैल को कार्यशाला आयोजित की जाएगी। सांसदों की तरह निजी सचिवों को भी केंद्रीय योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

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