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मोदी की ताजपोशी से मुस्लिम नेता असहज
बृजेश सिंह/नई दिल्ली
Updated Sat, 14 Sep 2013 02:38 PM IST
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भाजपा द्वारा 2014 में होने वाले आम चुनाव के लिए नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का दावेदार घोषित किए जाने से मुस्लिम समाज असहज है।
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वे इस फैसले को देश की एकता व अखंडता के लिए भी सही नहीं मानते हैं। उनका यह भी मानना है कि इस कोशिश से यह भी पता चलता है कि भाजपा के पास देश की समस्याओं के लिए कोई नीति नहीं है, वह केवल फिरकापरस्ती के आधार पर समाज को बांटकर सत्ता पर काबिज होना चाहती है।
मुस्लिम लॉ पर्सनल बोर्ड के प्रवक्ता कासिम रसूल इलियास ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भाजपा के पास जनता से जुड़े मुद्दे नहीं हैं। वह एक ऐसा चेहरा ला रही है, जिससे सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण होगा।
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उन्होंने कहा कि इस फैसले से यह भी साबित हो गया कि भाजपा में कोई फैसला लोकतांत्रिक तरीके से नहीं लिया जाता। उनकी ही पार्टी के आडवाणी, सुषमा, मुरली मनोहर जोशी के विरोध को दरकिनार करते हुए आरएसएस के इशारे पर फैसला ले लिया गया।
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उन्होंने कहा कि इस फैसले से कांग्रेस के दस साल के कुशासन, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे अब पर्दे के पीछे चले जाएंगे।
इलियास का मानना है कि मोदी के नामकरण का फायदा भाजपा से ज्यादा कांग्रेस को मिलेगा। तीसरे मोर्चे की संभावना अब पूरी तरह खत्म हो गई है। लोग मोदी के खिलाफ फिर से यूपीए की सरकार का साथ देने के लिए मजबूर होंगे।
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सफदर एच खान कहते हैं कि यह भाजपा का आंतरिक मामला है कि वह किसे पीएम का उम्मीदवार घोषित करे।
साथ ही वे कहते हैं कि देश को वही व्यक्ति पीएम के रूप में स्वीकार होगा, जो सेक्युलर हो, ईमानदार हो तथा सभी को साथ लेकर चल सके।
मुस्लिम संगठनों की शीर्ष संस्था आल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (एआईएमएमएम) के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान कहते हैं कि मोदी जैसा व्यक्ति मुसलमानों को कभी स्वीकार नहीं हो सकता है। वे एक ऐसे व्यक्ति हैं जो दंगों के बाद भी गुजरात में मुस्लिमों को दरकिनार करने की कोशिश करते रहे हैं।
केंद्र की मुस्लिमों के कल्याण की योजनाओं को उन्होंने राज्य में लागू तक नहीं किया। ऐसा शख्स दिल्ली में आ गया तो क्या करेगा, इसका सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा की मोदी के सहारे केंद्र में आने की मंशा पूरी नहीं होगी। आज देश के लोग ज्यादा समझदार हो चुके हैं।