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मोदी की ताजपोशी ने बदले राजनीतिक समीकरण

Sat, 14 Sep 2013 07:58 AM IST
गुंजन कुमार/नई दिल्ली
गुंजन कुमार/नई दिल्ली Updated Sat, 14 Sep 2013 07:58 AM IST
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modi appointed pm candidate change political scenario

भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजपोशी ने केंद्रीय राजनीति के सारे समीकरण पलक झपकते ही बदल डाले हैं।

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नई परिस्थितियों ने कांग्रेस के धुर विरोधी दलों को असमंजस में डाल दिया है। मोदी की ताजपोशी के साथ ही लोकसभा चुनाव के धर्मनिरपेक्षता बनाम सांप्रदायिकता के मुद्दे पर लड़ा जाना तय हो गया है।
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ऐसे में भ्रष्टाचार, माली अर्थव्यवस्था जैसे कई मुद्दों पर बुरी तरह घिरी कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता के बहाने भाजपा विरोधी दलों को साथ लाने की मुहिम छेड़ सकती है। नए समीकरण से तीसरे मोर्चे के गठन की संभावना को भी क्षीण कर दिया है।
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असली मुश्किल वामदलों, बीजेडी, तृणमूल कांग्रेस और टीडीपी जैसे दलों के लिए सामने खड़ी हुई है जो कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ अलग-अलग गैर भाजपा-गैर कांग्रेसी दलों को एक मंच पर लाने की रणनीति पर काम कर रहे थे।

नब्बे के दशक से हर चुनाव से पहले गैर भाजपा-गैर कांग्रेस की राजनीतिक जमीन तैयार करने वाले वाम दलों के लिए नया राजनीतिक समीकरण ज्यादा परेशान करने वाला है।

हालांकि वाम दल इस बार चुनाव के बाद गैर भाजपा-गैर कांग्रेस की जमीन तैयार करने के पक्ष में थे, लेकिन नई परिस्थितियों में उन्हें अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा।


वाम दलों का साथ देने वाली पार्टियां भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस के साथ खड़ा होने का भी सुझाव दे सकती हैं।

इसके अलावा फेडरल फ्रंट के गठन के प्रयास में जुटी तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी को भी इसी तरह की परिस्थितियों से दो चार होना होगा। कुछ इसी तरह की हालत बीजेडी के अध्यक्ष नवीन पटनायक, टीडीपी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू की भी होगी।

हां, नई परिस्थितियों ने जदयू और कांग्रेस के संबंध और मजबूत होने की जमीन तैयार कर दी है। भाजपा से तलाक के बाद वैसे भी जदयू की नजदीकियां कांग्रेस के साथ लगातार बढ़ रही थी।

अब नई परिस्थिति में दोनों दल चुनावी तालमेल पर गंभीरता से बातचीत शुरू कर सकते हैं।

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