मिशन 2014: राजनाथ-मोदी की जुगलबंदी

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 28 Jan 2013 12:15 AM IST
modi and rajnath discuss 2014 lok sabha polls
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नितिन गडकरी के बजाए राजनाथ सिंह के भाजपा अध्यक्ष की कमान थामने के बाद गुजरात में जीत की हैट्रिक लगा चुके नरेंद्र मोदी रविवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने नए पार्टी अध्यक्ष के साथ मिशन 2014 पर लगभग दो घंटे तक विचार-विमर्श किया। बैठक के बाद मोदी ने केंद्र की राजनीति में आने का स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि भाजपा की गुजरात इकाई देश सेवा के लिए तैयार है।
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वहीं, अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को शिकस्त देने के प्रयास में जुटी पार्टी ने मोदी को चुनाव अभियान समिति की बागडोर सौंपने की तैयारी कर ली है। ऐसे में लगभग साफ हो गया है कि 2014 में भाजपा के सिर जीत का सेहरा सजाने की जिम्मेदारी राजनाथ और मोदी की जुगलबंदी पर होगी।


भाजपा पिछले नौ साल से केंद्र की सत्ता से बाहर है। ऐसे में वह अपने मिशन 2014 को खुशनुमा अंजाम देना चाहेगी। पार्टी इसका आगाज इस साल होने वाले नौ राज्यों के विधानसभा चुनावों से करना चाहती है। पार्टी में इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। राजनाथ सिंह पार्टी की कमान संभाल चुके हैं।

लोकसभा चुनाव में मोदी को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की मांग उठ रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मोदी के समर्थन का संकेत दे चुके हैं। इतना ही नहीं विभिन्न सर्वेक्षणों में भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर मोदी सबसे अधिक पसंद किए जा रहे हैं।

अब नए अध्यक्ष को जल्द ही अपनी नई टीम बनानी है। माना जा रहा है कि वे मोदी को पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था संसदीय बोर्ड में ला सकते हैं। फिलहाल दोनों नेताओं के संबंध भी बेहतर हैं। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि भाजपा के मिशन 2014 की कमान पार्टी इन दो दिग्गजों के हाथ होगी। वैसे तो मोदी राजनाथ सिंह को अध्यक्ष बनने की बधाई देने दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुंचे थे, लेकिन दोनों नेताओं के बीच 2014 के लोकसभा चुनाव पर लंबी बातचीत हुई। बैठक में गुजरात सरकार के कामकाज को लेकर भी चर्चा हुई।

मोदी की राह में रुकावट
भाजपा के कार्यकर्ता और विभिन्न सर्वे भले ही मोदी को पीएम पद का दावेदार के तौर पर देख रहे हैं लेकिन उनकी दिल्ली की राह उतनी आसान नहीं है। वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली से लेकर राजनाथ सिंह तक पीएम पद की दौड़ में शामिल हैं। आडवाणी ने गडकरी मामले में साबित कर दिया है कि भाजपा में वह अब भी सबसे ताकतवर नेता हैं और संघ को उनके सामने झुकना पड़ा है।

मोदी की चुप्पी के मायने
भाजपा के नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पिछले दिनों पार्टी में मचे घमासान के दौरान मोदी लगातार खामोश रहे। उन्होंने न तो संघ के समर्थन में बयान दिया और न ही लालकृष्ण आडवाणी के विरोध में, क्योंकि वे जानते हैं कि दिल्ली में अपनी दखल बढ़ाने के लिए उन्हें सभी के साथ संबंध सुधारने होंगे।

मुलाकात के मायने
राजनाथ सिंह के 2006-2009 के बीच भी भाजपा अध्यक्ष थे। तब दोनों नेताओं के बीच गहरे मतभेद उभरे थे। वैसे शुरुआत में राजनाथ सिंह ने मोदी को संसदीय बोर्ड में रखा था, लेकिन दोनों नेताओं के संबंध कुछ इस कदर बिगड़े कि बाद में नरेंद्र मोदी को बोर्ड से बाहर कर दिया गया। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के जरिए मोदी और राजनाथ यह दिखाना चाहते हैं कि मतभेद खत्म हो गए हैं और दोनों मिलकर नई शुरुआत को तैयार हैं।

'भाजपा की गुजरात इकाई अब देश सेवा को तैयार है। राष्ट्रीय राजनीति में प्रदेश इकाई का योगदान किस तरह का होगा, इस पर विचार किया जा रहा है। मैंने पार्टी के नए अध्यक्ष को आश्वासन दिया है कि गुजरात के भाजपा नेता और कार्यकर्ता देश सेवा में हरसंभव सहयोग को तैयार हैं।'
- नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री गुजरात

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