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आखिर क्या पढ़ते हैं ओबामा और मोदी?

Sat, 06 Dec 2014 08:12 AM IST
Updated Sat, 06 Dec 2014 08:12 AM IST
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Modi and Obama What like to read

भारत में नेतागण क्या पढ़ते हैं ये शायद ही किसी को पता होगा। आज भी हम प्रधानमंत्री मोदी या उनके पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह की पढ़ने की आदतों के बारे में ज्यादा नहीं जानते। लेकिन इसके विपरीत अमरीका में राष्ट्रपति क्या पढ़ते हैं यह साफ होता है और इससे उनके फैसलों को समझना आसान होता है।

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ओबामा ने पिछले साल से अब तक कौन सी किताबें ली हैं इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि वह किस दिशा में सोच रहे हैं। भारत इस मायने में खुशनसीब था कि उसका पहला प्रधानमंत्री एक विद्वान व्यक्ति था। जवाहरलाल नेहरू एक प्रतिष्ठित लेखक-इतिहासकार थे जिन्होंने अन्य चीजों के अलावा प्रभावशाली किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया, ग्लिम्प्स ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री और एक दमदार आत्मकथा लिखी।
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उनकी बेटी, भारत की तीसरी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (अंतरिम को छोड़ दें) भी जानी-मानी पढ़ाकू व्यक्ति थीं। अगर बाकी चीजें छोड़ भी दें तो उनके पिता के नियमित रूप से लिखे जाने वाले खत उन्हें जानकारियां देते रहे होंगे। देश के नौवें प्रधानमंत्री, पीवी नरसिम्हा राव भी पुस्तक प्रेमी और विद्वान तो थे ही वह मातृभाषा तेलुगु के अलावा मराठी और स्पेनिश में भी मूल साहित्य पढ़ सकते थे।
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इनके बीच के और बाद के प्रधानमंत्रियों के पढ़ने की आदतों के बारे में कम ही पता है। जैसे कि, इसके अलावा कि स्वामी विवेकानंद का उन पर गहरा प्रभाव है, हमें यह जानकारी बहुत कम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोजमर्रा के जीवन में क्या पढ़ते हैं, फाइलों और कागजों के अलावा।

किताबों के लिए अक्सर बाहर जाते हैं ओबामा

Modi and Obama What like to read

अमेरिका में ऐसा नहीं है। वहां राष्ट्रपति की पाठ्य सामग्री को विशेष रूप से समयानुसार दर्ज किया जाता है और समय-समय पर पुनर्जांच की जाती है ताकि इसका सरकार और नीतियों पर असर देखा जा सके। राष्ट्रपति को अक्सर हवाई जहाज में आते या जाते हुए किताब लिए हुए देखा जा सकता है और कई बार तो वह जो पढ़ रहे होते हैं, उस पर सार्वजनिक रूप से बात भी करते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा पिछले शनिवार को वॉशिंगटन डीसी में एक किताबों की दुकान, पॉलिटिक्स एंड प्रोस, में गए और छुट्टियों में पढ़ने और उपहार देने के लिए किताबें लीं। उनका किताबों के लिए बाहर जाना, अब एक वार्षिक कार्यक्रम बनता जा रहा है। इससे राजनीतिक और साहित्यिक विश्लेषकों को विषय पर अपने अधिकार के साथ उनके निष्पादन को आंकने का मौका मिलता है। यह ऐसी चीज है जिसे भारत में बहुत कम तवज्जो मिलती है।

लेखक और पाठक
नेहरू की तरह ओबामा भी जाने माने लेखक हैं और उनकी किताबें ड्रीम्स ऑफ माय फादर और ऑडेसिटी ऑफ होप- लाखों की संख्या में बिकी हैं। ये दोनों बेस्ट सेलर किताबें उन्होंने राष्ट्रपति बनने से पहले लिखी थीं। करीब पांच साल, जबसे वह राष्ट्रपति बने हैं, उनकी पाठ्य सामग्री की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि उनके नीति निर्धारण को समझा जा सके।

उदाहरण के लिए एक बार प्रचार के दौरान उन्हें जहाज से उतरते वक्त फरीद जकारिया की, दि पोस्ट-अमेरिकन वर्ल्ड, लिए हुए देखा गया (इसे उनके कुछ विरोधियों को यह कहने का मौका मिल गया कि वह अमरीका के पतन के बारे में एक मुस्लिम लेखक की किताब पढ़ रहे हैं।) लेकिन जकारिया की लिखी वह किताब अमरीका के पतन के बारे में नहीं है बल्कि बाकी सभी देशों के उत्थान के बारे में है, खासतौर पर चीन और भारत के। यह वही विचार है जो ओबामा के भाषणों का आधार बना है कि अमरीका को आगे रखना है।

नेताओं की रूचि बताती है उनकी किताब की पसंद

Modi and Obama What like to read

शनिवार को ओबामा की खरीदी किताबों के आधार पर नीतिगत कदम की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन यह उल्लेखनीय है कि उन्होंने जाने-माने भारतीय मूल के अमरीकी डॉक्टर, अतुल गवांडे की किताब- बीइंग मॉर्टल, खरीदी।

न्यूयॉर्क पत्रिका के नियमित लेखक गवांडे एक सर्जन होने के साथ ही हॉर्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर भी हैं। वह राष्ट्रपति क्लिंटन के समय में व्हाइट हाउस के सहायक भी रहे हैं। बीइंग मॉर्टल उनकी चौथी किताब है और यह ऐसे समाज में बुढ़ाती स्वास्थ्य सेवा और जीवन स्तर पर केंद्रित है जो आसानी से उम्र बढ़ने और मृत्यु की प्रक्रिया को स्वीकार नहीं करता।

इसी तरह 2013 में खरीदी गई ओबामा की किताबें उनकी ताजा रुचि की झलक दिखाती हैं। उन्होंने एशियाई मूल के दो अमरीकी लेखकों की किताबें खरीदीं जो झुंपा लाहिड़ी की दि लोलैंड और खालिद हुसैनी की काइट रनर है।

यकीनन कोई बकैत 1960 के नक्सल प्रभावित भारत में राजनीतिक विद्रोही दो भाइयों की जमीनी कहानी के कुछ अर्थ निकाल सकता है लेकिन अन्य लोग ली कैरे की तर्ज वाले जासूसी रोमांच कथा, रेड स्पैरो, को देखेंगे जो अमरीका और रूस के बीच तनाव पर है और इसे रूस के प्रति ओबामा के नजरिए पर परखेंगे।

क्या पढ़ते हैं मोदी और मनमोहन

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ओबामा के पूर्ववर्ती जॉर्ज बुश भी, उनकी बुद्धिमत्ता को लेकर किए जाने वाले मजाक के विपरीत, घोर पढ़ाकू बताए जाते हैं। हालांकि कुछ लोग यह भी कहते हैं कि उनमें यह आदत उनकी लाइब्रेरियन बीवी, लॉरा बुश, ने डाली थी।

माना जाता है कि 90 के दशक की शुरुआत में बाल्कन संकट पर राष्ट्रपति क्लिंटन के नजरिए पर रॉबर्ट कपलान की, बाल्कन घोस्ट्स, किताब का असर था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के हालिया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी के पढ़ने के बारे में कम ही पता है। हालांकि दिल्ली के कुछ समीक्षकों का कहना है कि वह अपनी फाइलों, विवरणों और कागजों के अलावा कम ही पढ़ते थे।

लेकिन मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू के अनुसार तत्कालीन प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी दोनों ही बहुत उत्सुक और घोर पढ़ाकू थे जो जीवनियां, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, इतिहास, अर्थशास्त्र, सामयिक राजनीति के बारे में पढ़ा करते थे। उनके सप्ताहांत तो किताबें पढ़ने में ही बीतते थे।

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