अब्दुल्ला पर पलटवार, कश्मीरी पंडितों पर पहली बार बोले मोदी
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चुनावी मौसम में अब कश्मीर पर बवाल हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के बॉस और केंद्रीय मंत्री फारुक अब्दुल्ला ने नरेंद्र मोदी और भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा था कि देश सांप्रदायिकता से नहीं चल सकता।
चुनाव प्रचार के दौरान हुए धमाकों का जिक्र करते हुए खनयार में फारुक अब्दुल्ला ने कहा, "इन धमाकों से मैं डिगने वाला नहीं हूं और न ही इनसे आप पर फर्क पड़ना चाहिए...खुदा से दुआ कीजिए कि हम सांप्रदायिक ताकतों से बचकर आगे बढ़ सकतें।"
उन्होंने कहा, "भारत कभी सांप्रदायिक नहीं बन सकता। अगर यह कम्युनल बनाता है, तो कश्मीर भारत के साथ नहीं रहेगा। कश्मीरियों को सांप्रदायिकता मंजूर नहीं हैं।" अब्दुल्ला के इस बयान पर नरेंद्र मोदी ने करारा पलटवार किया।
मोदी ने उठाई कश्मीरी पंडितों की बात
भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने कहा कि फारुक अब्दुल्ला से इस तरह के बयानों की उम्मीद नहीं की जाती। उन्हें यह सब शोभा नहीं देता, इसलिए उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए।
मोदी ने कहा, "मैं अब्दुल्ला से कहना चाहता हूं कि हजारों साल के हिंदुस्तान और कश्मीर की परंपरा समावेशी रही। अगर कहीं इस परंपरा को सबसे बड़ी चोट, सबसे गहरी चोट लगी, तो वो कश्मीर में लगी।"
गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा, "कश्मीर ही इकलौती ऐसी जगह है, जहां पंडितों को धर्म के आधार पर बाहर कर दिया गया। हमें वोट देने वालों को वो दरिया में डूबने की बात करते हैं।"
'किस मुंह से सेकुलरिज्म की बात करते हैं'
नरेंद्र मोदी ने कहा, "आपने कश्मीर की राजनीति को कौमी रंग देने का काम किया। देश में सुधी परंपरा, सर्व समावेशी पंरपरा थी, लेकिन कश्मीर में आपकी राजनीति ने इसे बिगाड़ दिया।"
उन्होंने कहा, "कश्मीर के पंडितों को वहां से खदेड़ा गया। ये लोग किस मुंह से देश को सेकुलर का सर्टिफिकेट बांटने की बात करते हैं। हम चुप हैं, इसका यह मतलब नहीं कि हम कमजोर हैं या इन्हें समझते नहीं।"
अब्दुल्ला ने यह भी कहा था कि जो लोग मोदी को वोट देते हैं, उन्हें दरिया में डूब जाना चाहिए। जाहिर है, भाजपा ने अब्दुल्ला के इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए जवाबी हमला बोला है।
जेटली ने कहा, डल झील में डुबकी मार लें
नरेंद्र मोदी ने जहां एनसी नेता के हमले पर खुद पलटवार किया, वहीं पंजाब में मौजूद अरुण जेटली ने भी उन्हें आड़े हाथों लिया। जेटली ने कहा कि जो लोग उन्हें सेकुलरवाद का ज्ञान दे रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए।
अमृतसर से पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रहे जेटली ने कहा, "सेकुलरवाद अगर कहीं सबसे ज्यादा नाकाम हुआ, तो वो जगह जम्मू कश्मीर है। वहां से पंडितों को बाहर निकाल दिया गया।"
उन्होंने कहा, "इस बात को 25 साल गुजर चुके हैं और आज भी हालात ऐसे नजर नहीं आ रहे कि वो लोग लौट जाएं। मैं कहना चाहता हूं कि ये लोग समंदर भूल जाएं, लेकिन प्रायश्चित करने के लिए डल झील में एक बार डुबकी मार लें।"
पहले भी घिरे रहे विवादों में
यह सारा बवाल फारुक अब्दुल्ला के बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने मोदी पर निशाना साधते हुए सेकुलरिज्म की बात उठाई थी। श्रीनगर-बडगाम संसदीय सीट के लिए आयोजित एक जनसभा में उन्होंने कहा था कि मोदी को वोट देने वालों को समंदर में डूब जाना चाहिए।
कुछ दिन पहले बिहार के भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने मोदी का विरोध करने वालों को पाकिस्तान चले जाने की सलाह दी थी। जिस पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पलटवार कर कहा था कि वे मोदी की आलोचना बंद नहीं करेंगे, भले ही उन्हें पाकिस्तान ही क्यों न जाना पडे़।
अब उनके पिता के मोदी के खिलाफ इस विवादित बयान के बाद वे विरोधियों के निशाने पर आ सकते हैं। इससे पहले राजबाग में आयोजित एक जनसभा में वे पीडीपी के खिलाफ विवादित बयान दे चुके हैं।
उमर भी कूदे लड़ाई में
जाहिर है, अपने पिता पर हुए मोदी के जवाबी हमले से जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी तिलमिला गए। उन्होंने मोदी के पलटवार पर फिर हमला बोला। उन्होंने कहा, "भाजपा कश्मीरी पंडितों का सियासी इस्तेमाल कर रही है। सभी चाहते हैं कि कश्मीरी पंडित वापस आएं।"
उन्होंने कहा, "कश्मीर में पंडितों को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। उन्हें वापस लाने की कोशिशें भी हो रही है। मोदी इतिहास अपने हिसाब से समझते हैं। मोदी को कश्मीरियों से सेकुलरिज्म सीखना चाहिए। हमने कश्मीर में पंडितों को लौटाने की शुरुआत की है।"
जाहिर है, चुनावी महासमर में छोटी सी छोटी बात भी बड़ा मुद्दा बन जाएगी। कश्मीरी पंडितों का मामला बेहद संवेदनीशल माना जाता है। ऐसे में अब्दुल्ला के हमले पर मोदी का पलटवार और फिर उमर के अटैक ने यह मामला गर्मा दिया है।