बहुमत के लिए ये है मोदी और शाह का बड़ा दांव
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नरेंद्र मोदी ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में इस बात को हवा देते हुए कहा कि राजनीति में कोई अछूत नहीं होता। इसके तुरंत बाद मोदी के सिपहसलार और खासमखास अमित शाह ने भी बयान देने में देर नहीं लगाई कि भाजपा को समर्थन लेने में कोई परहेज नहीं है।
मगर बसपा और तृणमूल कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर भाजपा को समर्थन नहीं देंगे। जबकि टीआरएस ने भी कह दिया है कि उसकी पहली पसंद यूपीए होगी। हालांकि जयललिता ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
मोदी से एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि क्या जरूरत पड़ने पर वह एआईडीएमके अध्यक्ष जयललिता, बसपा सुप्रीमो मायावती और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से समर्थन मांग सकते हैं? इसके जवाब में मोदी ने कहा था कि राजनीति में कोई अछूत नहीं होता।
मोदी बोले किसी से परहेज नहीं
मोदी से एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि क्या जरूरत पड़ने पर वह एआईडीएमके अध्यक्ष जयललिता, बसपा सुप्रीमो मायावती और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से समर्थन मांग सकते हैं? इसके जवाब में मोदी ने कहा था कि राजनीति में कोई अछूत नहीं होता।
बाद में उत्तर प्रदेश में भाजपा के चुनाव प्रभारी शाह ने भी कहा कि हमारी पार्टी ‘पॉलिटिकल अनटचबिलिटी’ में विश्वास नहीं रखती। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा को 300 से ज्यादा सीटें मिल रही हैं और नरेंद्र मोदी अभी से पीएम पद के लिए ‘लॉक’ हो गए हैं।
बावजूद इसके भाजपा को किसी भी दल से समर्थन लेने पर परहेज नहीं है। एनडीए में सभी पार्टियों का स्वागत है। मगर दूसरी तरफ सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने का दम रखने वाली ममता बनर्जी और मायावती ने दो टूक कह दिया है कि वे किसी भी हालत में मोदी या भाजपा को समर्थन नहीं देंगी।
मायावती ने किया साफ इंकार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने मोदी के इंटरव्यू पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘मैं यह साफ करना चाहती हूं कि बसपा किसी भी कीमत पर मोदी या एनडीए को समर्थन नहीं देगी।
जब चुनाव शुरू हुए थे, तो मोदी ने दावा किया था कि एनडीए को किसी के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कोई भी पार्टी तब तक समर्थन की बात नहीं करती, जब तक कि वह अपनी जीत को लेकर सुनिश्चित हो। मोदी का यह इंटरव्यू अल्पसंख्यक समुदाय के मन में संशय पैदा करने के लिए चली गई चाल है।’
कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने भी कहा, ‘मौजूदा स्थिति को देखते हुए भाजपा या एनडीए सरकार नहीं बना सकती। प्रत्येक महत्वपूर्ण दल भाजपा और मोदी से दूरी बना रहा है।
इसी बात को हम शुरू से कहते आ रहे थे कि मोदी का पीएम बनना और भाजपा का सत्ता में आना असंभव है।’
ममता के भी दरवाजे पहले से बंद
उधर, पश्चिम बंगाल की फायर ब्रांड सीएम ने भी मोदी के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं। उन्होंने मायावती से दो कदम आगे बढ़ते हुए कहा, ‘समर्थन का तो सवाल ही नहीं बनता, अगर वह दिल्ली में होती तो दंगा बाबू को जेल भिजवा देती।’
ममता ने कांग्रेस पर भी डरने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस डर गई है और इसी वजह से भाजपा इतना बढ़ चढ़कर बोल रही है। टीआरएस अध्यक्ष चंद्रशेखर राव की भी पहली पसंद यूपीए ही है, जिसने उन्हें अलग तेलंगाना राज्य दिलाने में मदद की।
उन्होंने साफ किया कि अगर यूपीए केंद्र में सरकार बनाने की स्थिति में होगी, तो वही उनकी पहली पसंद होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो फिर वे तीसरे मोर्चे के साथ जाएंगे।
जाति पर भी जंग
लोकसभा चुनावों के आखिरी चरण के मतदान से पहले ओबीसी वोटरों को लुभाने के लिए भाजपा और कांग्रेस में जाति को लेकर भी जंग तेज हो गई है।
कांग्रेस जहां नरेंद्र मोदी की जाति पर सवाल उठा रही है और उन्हें फर्जी ओबीसी करार दे रही है, वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए नेहरू परिवार के लोगों की जाति गांधी होने पर सवालिया निशान लगा दिया है।