मोदी ने अपनी पत्नी पर किया चौंकाने वाला खुलासा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आखिरकार वडोदरा में नामांकन भरते समय नरेंद्र मोदी ने जसोदाबेन को अपनी पत्नी स्वीकार कर ही लिया।
पिछले चार विधानसभा चुनावों में पत्नी के नाम का कॉलम खाली छोड़ने वाले मोदी ने इस बार इस कॉलम में नाम लिखा - 'जसोदाबेन'।
मोदी के इस स्पष्टीकरण से जहां उनके समर्थक असंमजस में हैं वहीं विरोधियों की बांछें खिल गई है।
विरोधी कह रहे हैं कि अब मोदी की लोकप्रियता में भारी कमी आएगी क्योंकि जसोदाबेन की व्यथा देखकर महिलाएं मोदी को वोट नहीं देंगी।
पत्नी तो माना लेकिन आय की जानकारी नहीं
टीएनएन नेटवर्क के अनुसार जब भारी भीड़ के साथ मोदी नामांकन करने पहुंचे तो लोगों में इस बात की सगबुगाहट थी कि क्या इस बार भी मोदी पत्नी वाला कॉलम खाली छोड़ देंगे।
लेकिन उम्मीदों के उलट इस बार मोदी ने जसोदाबेन को पत्नी मानते हुए उनका नाम लिख दिया।
मोदी ने कॉलम में जसोदाबेन का नाम लिखा लेकिन जसोदाबेन की आय, आईटी रिटर्न और पैन नंबर की जानकारी होने से इनकार कर दिया।
चार बार खाली छोड़ चुके हैं कॉलम
63 साल के हो चुके मोदी अभी तक खुद को अविवाहित कहते आ रहे हैं। जसोदाबेन के सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद भी मोदी इस मसले पर चुप्पी साध लेते थे। यहां तक कि 2001, 2002, 2007 और 2012 में विधानसभा चुनावों में मोदी ने पत्नी वाला कॉलम खाली छोड़ दिया था।
2001 में राजकोट में विधानसभा उप चुनाव के दौरान कांग्रेस ने मोदी की पत्नी का मुद्दा उठाकर भुनाने की कोशिश की थी। तब कांग्रेस ने घर घर पैम्पलेट बंटवा कर जसोदाबेन का मसला उछाला था। लेकिन मोदी कभी भी इस मसले पर कुछ नहीं बोले।
मोदी के इस कदम से उनके समर्थक भले ही असमंजस में हो लेकिन विरोधियों की बांछे खिल गई है। कांग्रेसी प्रतिद्वंदी का कहना है कि मोदी द्वारा जसोदाबेन को पत्नी मानने से उनकी लोकप्रियता में कमी आएगी।
मोदी महिला सशक्तिकरण की बातें करते हैं लेकिन उनकी पत्नी की व्यथा जानकर देश की महिलाएं मोदी का साथ कतई नहीं देंगी।
यूं ही नहीं माने मोदी
हालांकि ऐसा नहीं है कि मोदी खुद जसोदाबेन का नाम लिखना चाहते थे। भाजपा के लीगल एक्सपर्ट ने कहा कि इस बार उनकी पत्नी का मुद्दा इस कदर गरमा गया है कि उस कॉलम को छोड़ना खतरे से खाली नहीं होगा।
मोदी को सलाह दी गई कि इस मुद्दे पर मोदी को अपना पक्ष स्पष्ट रखना होगा अन्यथा उनके चुनाव को रद्द भी किया जा सकता है।
जनप्रतिनिधि एक्ट 1951 के अनुसार हर प्रत्याशी को अपने जीवनसाथी की सही जानकारी देनी जरूरी है। यहां तक कि जीवनसाथी की आय और आय के साधन की जानकारी भी फार्म में लिखनी है।