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'मोबाइल' के जरिए लड़ी जाएगी लोकसभा चुनावों की जंग

Sun, 16 Mar 2014 09:43 AM IST
Updated Sun, 16 Mar 2014 09:43 AM IST
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mobile play important role in loksabha election 2014

हाईटेक प्रचार के मामले में मील का पत्थर साबित हो रहे 2014 केलोकसभा चुनाव में मोबाइल फोन प्रचार अभियान का बड़ा हथियार बन चुका है।

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भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के फोन मोदी आने वाला है रिंग टोन से गूंज रहे हैं जबकि आम आदमी पार्टी भी अपनी कॉलर ट्यून के जरिए माहौल बनाने में जुटी है।

देश भर में अन्ना आंदोलन की लहर शुरू करने में अहम भूमिका निभाने वाले मोबाइल फोन की ताकत को पहचाते हुए टेलीकॉम और मोबाइल मार्केटिंग कंपनियां ने एमएमएस, कॉलर ट्यून और मोबाइल एप्स के जरिए कमाई के कई तरीके निकाल लिए हैं।

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भाजपा-आम आदमी पार्टी में मुकाबला

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भाजपा और आप के कॉलर ट्यून की लोकप्रियता को टेलीकॉम कंपनियां खूब भुना रही हैं। नमो के मुकाबले आप की कॉलर ट्यून जेब पर ज्यादा भारी पड़ रही है। सिर्फ 15 रुपये खर्च कर 90 दिनों के लिए आम की कॉलर ट्यून लगाई जा सकती है।

लेकिन इसके लिए 36 रुपये प्रतिमाह भी देने होंगे। नरेंद्र मोदी ही लहर का बखान करने वाली कॉलर ट्यून लगाने का खर्च 30 रुपये महीना है।

चुनावी माहौल में कॉलर ट्यून के कमाई के लिए टेलीकॉम कंपनियां कई दूसरी पार्टियों संपर्क साध रही है। राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी बताते हैं कि उनकी पार्टी ने टेलीकॉम पर मिस्ड कॉल देकर लोगों को जोड़ने का अभियान शुरू किया है।

जल्द ही कई इस तरह के कई दूसरे एप्लीकेशन भी शुरू किए जाएंगे। भाजपा तो एक कदम आगे जाकर मोबाइल वोट बैंक बनाने में जुटी है।

खूब रुपए कमा रही कंपनियां

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एयरटेल जैसी मोबाइल कंपनियां 125-200 रुपये में 3000 हजार एसएमएस के पैकेज बेच रही हैं। इन्हें ज्यादातर मोबाइल मार्केटिंग कंपनियां खरीदती हैं, जो उम्मीदवारों से प्रति एसएमएस 15-20 पैसा चार्ज करती हैं।

यानी अगर एक लोकसभा में 20 लाख एसएमएस भेजने हैं तो 3-5 लाख रुपये तक का खर्च आएगा। इसी तरह कॉलर ट्यून पर भी टेलीकॉम कंपनियां को प्रति माह एक कनेक्शन पर औसतन 30 रुपये की कमाई होती है।

देश में 92 करोड़ टेलकॉम ग्राहक हैं। अगर एक करोड़ कॉलर ट्यून डाउनलोड होती हैं तो सीधे 30 करोड़ की कमाई है।

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