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ASI ने भगवा झंडा फहराने से रोका

Tue, 23 Feb 2016 07:05 PM IST
Updated Tue, 23 Feb 2016 07:05 PM IST
mob beaten cop and forced him to wave saffron in maharashtra

महाराष्ट्र में भगवा झंडा न फहराने के कारण दक्षिणपंथी संगठनों की भीड़ ने एक पुलिस वाले को बुरी तरह पीट दिया। लातूर जिले के पानगांव में शनिवार को एएसआई शेख यूनुस पहामिया को भीड़ ने घेर लिया और उन्हें डंडे से पीटा। यूनुस शेख के मुताबिक, भीड़ में शामिल लोग उन्हें भगवा झंडा फहराने, परेड करने और नाचने के लिए कह रहे थे। उन्होंने ऐसा नहीं किया, जिसके बाद उन्हें बुरी तरह मारा गया।



इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, शेख यूनुस को पीटा और गांव में घुमाया गया, जबकि पुलिस उनका बचाव भी नही कर सकी। शेख के परिजनों ने वारदात की विभागीय जांच की मांग की। परिजनों ने बताया कि पानगांव में शनिवार को उग्र भीड़ ने यूनुस शेख पर हमला किया, रेनापुर थाना महज 15 किमी की दूरी पर है, लेकिन पुलिस वहां पहुंच नहीं सकी।


यूनुस शेख रेनापुर में पोस्टेड हैं, वारदात के दिन वह पानगांव चौकी में पर तैनात थे। मामले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक किशोर भी शामिल है।

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एएसआई को 'जय भवानी, जय शिवाजी' का नारा लगाने को कहा

mob beaten cop and forced him to wave saffron in maharashtra

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, भीड़ में शामिल लोगों ने शेख को पीटा और उन्हें 'जय भवानी, जय शिवाजी' का नारा लगाने को कहा। शेख और वहीं तैनात एक अन्य पुलिसकर्मी हेड कॉन्‍स्टेबल के अवास्कर ने भीड़ को अंबेडकर चौक में भगवा झंडा फहराने से रोक दिया था। अंबेडकर चौक को संवेदनशील क्षेत्रों की सूची में रखा गया है।

लातूर ‌सिविल अस्पताल में भरती शेख ने बताया‌ कि उन्होंने तुरंत ही कंट्रोल रूम को फोन किया और हालात का ब्योरा दिया था। अपने मोबाइल से उन्होंने रेनापुर पुलिस थाने के प्रभारी के मोबाइल पर बात की। हालांकि उसके बाद भी उन्होंने वक्त पर पुलिस बल नहीं भेजा।

शेख ने बताया कि पुलिस 10 बजकर 10 मिनट पर आई और तबतक भीड़ उन्हें बुरी तरह पीट चुकी थी। उन्हें गांव में घुमाया गया। लातूर एसपी द्यानेश्वर चह्वाण ने बताया कि वारदात के दिन 8.30 से 8.45 के बीच शेख के दो फोन आए थे और पानगांव तक 9.50 तक पुलिस बल पहुंच चुका था।

यूनुस ने भगवा झंडा फहराने से रोका था

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महाराष्ट्र के डीजीपी प्रवीण दीक्षित ने बताया कि मामले में औरंगाबाद आईजी से रिपोर्ट मांगी गई है। शेख ने बताया कि उन पर हमला 20 फरवरी को लगभग 8.30 बजे हुआ। लगभग 100 लड़कों की भीड़ पुलिस चौकी के बाहर जमा हो गई।

शेख ने बताया कि उन्होंने और अवास्कर ने एक रात पहले लगभग 25 लड़कों की एक भीड़ को भगवा झंडा फहराने से रोक दिया था। पुलिस ने बताया कि लड़के शिवाजी जयंती मंडल नाम के किसी संगठन से जुड़े हुए ‌थे। शेख ने बताया कि उन्होंने भीड़ से मिन्नतें की कि उन्हें जाने दिया जाए, लेकिन उन्हें बुरी तरह पीटा गया।

पीटने के बाद भीड़ शेख को उसी जगह पर ले गई, जहां उन्होंने एक रात पहले‌ शिवाजी जयंती मंडल के सदस्यों को झंडा फहराने से रोका था। शेख ने बताया कि उनसे जबरिया झंडा फहरवाया गया और 'जय भवानी, जय शिवाजी' का नारा लगाने को कहा गया।

पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप

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शेख ने बताया कि वह केवल अपने ड्यूटी कर रहे थे। अंबेडकर चौक सांप्रदायिक तौर पर संवेदनशील इलाके के रूप में चिन्हित है, इसलिए उन्होंने भीड़ को रोका था। उन्होंने बताया कि भीड़ को आश्वासन ‌दिया गया था कि वे उन्हें झंडा फहराने के लिए बेहतर जगह उपलब्ध करवाएंगे।

शेख के बेटे फारूक यूनुस शेख ने बताया कि उनके पिता को भीड़ ने चुनकर मारा। एक और कांस्टेबल ने भीड़ को रोका था, लेकिन उन्हें कुछ भी नहीं किया गया। ऐसा क्यों किया गया, इससे हम क्या दिखलाना चाहते हैं?

फारूक ने बताया कि अगर अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंच जाता तो मेरे पिता को बचाया जा सकता ‌था। उन्होंने बतया कि मामले में अब तक जो गिरफ्तारियां हुई हैं, वे संतोषजनक नहीं है। शेख यूनुस 38 साल से महाराष्ट्र पुलिस में हैं और दो साल से पानगांव पुलिस चौकी में तैनात है।

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