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विधायक के ‘विशेष बिकिनी बीच’ बयान पर बवाल

Sun, 17 Aug 2014 08:00 PM IST
एजेंसी/पणजी
एजेंसी/पणजी Updated Sun, 17 Aug 2014 08:00 PM IST
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MLA demands special bikney beach in goa

गोवा में समुद्र किनारे विशेष बिकिनी बीच बनाने के महाराष्ट्र गोमंतक पार्टी (एमजीपी) के विधायक लावू मामलतदार के प्रस्ताव पर सियासी बवाल मच गया है।

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लावू ने अपने बयान में कहा था कि सरकार को समुद्र किनारे प्राइवेट पैड बीच बनाने चाहिए जहां महिलाओं को बिकिनी पहनने की अनुमति होगी।

कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह बिकिनी पर रोक लगाकर प्रदेश के समुद्र तटों का निजीकरण करना चाहती है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश की भाजपा सरकार ने अपनी सहयोगी दल के विधायक के बयान से पल्ला झाड़ लिया है।

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बिकनी बीच से होगी करोडों की कमाई

MLA demands special bikney beach in goa

विधायक लावू ने कहा था कि स्विम कपड़े पहनने पर रोक लगाने की स्थिति में विशेष बिकिनी बीच से न केवल पर्यटन राजस्व के घाटे को पूरा करने में मदद मिलेगी बल्कि इससे राजस्व में बढ़ोतरी भी होगी।

विधायक ने कहा कि यदि कुछ विधायकों को लगता है कि बिकिनी पर रोक लगाने के परिणामस्वरूप पर्यटन में कमी आएगी और इससे राजस्व को नुकसान होगा तो प्रदेश सरकार को विशेष बिकिनी बीच बनाने चाहिए।

साथ ही उन्होंने कहा कि इन बीच का इस्तेमाल करने वालों से 1000 से लेकर 2000 रुपये तक एंट्री फीस वसूली जा सकती है, जिससे राजस्व नुकसान की भरपाई हो सकेगी। रिटायर पुलिस अधिकारी लावू ने यह बात बृहस्पतिवार को विधानसभा में कही थी।

'भारतीय संस्कृति के खिलाफ है यह पहनावा'

MLA demands special bikney beach in goa

एमजीपी विधायक के बयान पर गोवा कांग्रेस ने ऐतराज जताया है। उसका कहना है कि प्रदेश सरकार महिलाओं की आजादी पर प्रतिबंध लगाना चाहती है।

साथ ही बिकिनी की आड़ में वह गोवा के बीच का निजीकरण करने की साजिश रच रही है। इस बीच प्रदेश के पर्यटन मंत्री दिलीप पारूलेकर ने लावू के बयान से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह उनकी अपनी राय है। हर व्यक्ति किसी भी मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त कर सकता है। इससे सरकार का कोई लेना देना नहीं है।

गौरतलब है कि पिछले महीने प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री ने सबसे पहले इस विवाद को हवा दी थी। उन्होंने बीच पर बिकिनी और पब में मिनी स्कर्ट्स पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।

उनका कहना था कि महिलाओं के ये पहनावे भारतीय संस्कृति के खिलाफ हैं। हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर के ऐसी किसी भी संभावना को खारिज किए जाने के बाद मंत्री को अपना बयान वापस लेना पड़ा था।

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