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अब मदर के घर से नहीं मिलेगा बच्चा गोद

Sun, 11 Oct 2015 01:26 AM IST
Updated Sun, 11 Oct 2015 01:26 AM IST
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Missionaries odf charity stops adoption proces

मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने केंद्र सरकार के नए दत्तक नियमों पर आपत्ति जताते हुए अनाथ बच्चों को गोद लेने और देने की अपनी सेवा को बंद करने का एलान किया है।

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इस संगठन के पास देशभर में 19 दत्तक केंद्र चलाने का लाइसेंस है, लेकिन फिलहाल उसके 15 ही केंद्र चल रहे थे। शनिवार को संगठन ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस साल अगस्त से ही बच्चों को गोद देना बंद कर दिया गया है।
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संगठन ने कहा है कि मदर की ओर से स्थापित कार्यों को जारी रखने के लिए नए दिशानिर्देशों के तमाम प्रावधानों का पालन करना बेहद कठिन होगा। केंद्रीय महिला व बाल कल्याण मंत्रालय के नए दिशा निर्देशों के मुताबिक अब बिन ब्याही अकेली महिलाएं भी दत्तक पुत्र गोद ले सकती हैं।
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माता-पिता कई बच्चों में से अपने लिए बच्चा चुन सकते हैं। समझा जाता है कि संगठन को अकेली मां या पिता, समलैंगिक लोगों के दत्तक पुत्र गोद लेने पर एतराज था। नई गाइडलाइन ने गोद लेने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। इसकी निगरानी सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी करेगी।

माता-पिता को बच्चा चुनने का अधिकार नहीं था

Missionaries odf charity stops adoption proces

पहले के दिशा निर्देशों में माता-पिता को बच्चा चुनने का अधिकार नहीं था। उन्हें एक ही बच्चा दिखाया जाता था और वही उन्हें गोद लेना होता था।

लेकिन नई गाइडलाइन में किसी दंपति को चार से छह बच्चों में से चुनने का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। माना जा रहा है कि मिशनरीज को सबसे ज्यादा आपत्ति इस पर ही है। हालांकि संगठन ने अपने बयान में इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

मिशनरीज की एक सिस्टर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि माता-पिता को गोद लेने के लिए बच्चों को चुनने का अधिकार देने का मतलब अनाथ बच्चों को सामान में बदलना है। तब यह पूरी प्रक्रिया एक अनमोल उपहार की बजाय मजाक बन कर रह जाएगी।

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