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आपदा में केदारनाथ मंदिर की दीवार को भी नुकसान
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Thu, 08 Aug 2013 12:06 AM IST
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उत्तराखंड में आई भीषण तबाही के बाद केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह की बाहरी दीवार मामूली रूप से क्षतिग्रस्त हो गई है।
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भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) के विशेषज्ञों की टीम ने हाल ही में मंदिर का दौरा किया, जिसके बाद यह पता चला है कि गर्भगृह के पूर्वोत्तर की बाहरी दीवार बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त हो गई है। एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक बीआर मनी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा, ‘कई जगहों पर मंदिर के भीतर पत्थर ढांचे में धंस गए हैं। मंडप के पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी प्रवेश द्वार से यह साफ तौर पर दिखाई देते हैं।’
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एएसआई के निदेशक (संरक्षण) जानविज शर्मा के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम ने 2 और 3 अगस्त को मंदिर का निरीक्षण किया था। उनके साथ भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के प्रतिनिधि भी थे।
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मनी ने बताया, ‘मंदिर में हुए नुकसान की समीक्षा की जा चुकी है और जब जल्द ही बहाली का काम शुरू कर दिया जाएगा। अभी हमारे समक्ष मौसम जैसी चुनौतियां हैं। बावजूद इसके काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। इसके लिए उत्तराखंड सरकार को हमें संसाधन मुहैया कराने होंगे।’
फंड के संबंध में उन्होंने कहा कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को फंड आवंटित करना होगा। इसके लिए हम एक अनुमान तैयार कर रहे हैं।
मनी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान मलबे में कुछ मूर्तियां बरामद हुई हैं, जिन्हें मंदिर परिसर से हटा लिया गया है। चूंकि मंदिर एक संरक्षित स्मारक नहीं है, इसलिए हम मूर्तियों के गुम होने के बारे में जानकारी देने की स्थिति में नहीं हैं। पहले इस संबंध में कोई दस्तावेज बनाए गए हैं या नहीं, इस बारे में हमें देखना होगा।
जीएसआई की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि भू विशेषज्ञ मंदिर की नींव, ढांचे और मिट्टी की स्टडी की और अगर पत्थरों को हटाना होगा, तो वह अपनी राय देंगे।
जब उनसे पूछा गया कि मंदिर के पीछे के ‘अलौकिक’ पत्थर को हटाया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि यह जीएसआई के विचार पर निर्भर करता है।
हालांकि मनी का मानना है कि यह पत्थर इतिहास का हिस्सा है और अगर इससे मंदिर को बचाए रखने में मदद मिलती है, तो इसे वहीं पर रहना चाहिए। बाढ़ के समय भी इसने मंदिर को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।