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केंद्र ने किया साफ, नहीं घटेगी नाबालिग की उम्र सीमा

Wed, 27 Feb 2013 09:06 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 27 Feb 2013 09:06 PM IST
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minor age limit will not be reduced clear government

दिल्ली गैंगरेप कांड जैसे जघन्य अपराधों में शामिल किशोरों को कड़ी सजा दिलाने के लिए नाबालिग की उम्र सीमा घटाने की देशभर से उठ रही मांग को सरकार ने दरकिनार कर दिया है।

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सरकार ने साफ कहा है कि केंद्र का किशोर न्याय कानून के तहत आरोपी की आयु सीमा 18 साल से घटाकर 16 साल करने का कोई इरादा नहीं है। सरकार ने तर्क दिया है कि देश में बाल अपराध बेहद कम होते हैं और उनमें से एक दो मामले ही गंभीर अपराध के होते हैं। अगर नाबालिग की उम्र घटाकर 16 कर दी जाती है तो छोटे-मोटे अपराधों के दोषी बच्चों के साथ न्याय नहीं होगा।
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राज्यसभा में बुधवार को एक सवाल का जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा कि देश में बाल अपराध दर दशमलव एक फीसदी है। जिसमें कुछ क्रूर, गंभीर और कुछ छोटे-मोटे अपराध हैं। छोटे-मोटे अपराधों में पैसे उठाना, भूख लगी तो रोटी उठाना जैसे अपराध शामिल है।
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अगर इस तरह के अपराध के लिए उनकी उम्र घटाकर 16 करके उनको पुलिस के हवाले कर दिया जाए तो यह हमारे देश के बच्चों के साथ न्याय नहीं होगा। ऐसे बच्चों को समझाने और मुख्य धारा में लाने की कोशिश की जानी चाहिए।

तीरथ ने कहा कि उनका कई गैर सरकारी संगठनों और बाल विशेषज्ञों से विचार विमर्श हुआ है। उन्होंने यही बताया है कि एक-दो बच्चे ही क्रूर अपराध करते हैं। जैसा कि दिल्ली गैंगरेप मामले में हुआ। इस मामले को हमें दुर्लभ से दुर्लभ मामलों के तौर पर देखा जाना चाहिए।

तीरथ ने कहा कि न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की अगुवाई में गठित समिति ने भी किशोर न्याय कानून में आयु सीमा घटाने के सुझाव का समर्थन नहीं किया है। वहीं, गैंगरेप के बाद भी दिल्ली में महिलाओं के साथ अपराधों को लेकर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा।

दुष्कर्म, हत्या के मामलों में न सुनी जाए दया याचिका

गृह मंत्रालय से जुड़ी एक संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि दुष्कर्म और हत्या के मामलों के दोषियों की दया याचिकाओं पर आम तौर पर सुनवाई ही नहीं की जानी चाहिए। यदि ऐसे किसी मामले में दोषी को माफी दी भी जाती है तो फिर इसकी वजह भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।


सूत्रों के मुताबिक क्रिमिनल लॉ (संशोधन) बिल, 2012 पर सुझावों के साथ समिति ने यह सिफारिश दी है। समिति ने यह भी कहा कि दया याचिकाओं का निपटारा तेजी के साथ किया जाना चाहिए। मालूम हो कि दिल्ली गैंगरेप के आरोपियों को फांसी देने की मांग उठ रही है, ऐसे में समिति की यह सिफारिश काफी अहम मानी जा रही है।

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