डांस बार को लेकर मंत्रियों में घमासान!
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महाराष्ट्र में सन 2005 से प्रतिबंधित डांस बार क्या फिर से गुलजार होंगे? इसको लेकर महाराष्ट्र के मंत्रियों में मचे घमासान से तो कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है। सूत्रों के अनुसार डांस बार बंदी को लेकर कांग्रेस और एनसीपी के नेता बंट गए हैं।
सोमवार को कैबिनेट की बैठक में गृहमंत्री आर.आर.पाटिल और उद्योगमंत्री नारायण राणे आपस में ही भिड़ गए। कैबिनेट की बैठक में एनसीपी के आर.आर.पाटिल ने डांस बारों को सदा के लिए बंद करने के लिए कड़े कानून बनाने की बात कही तो कांग्रेस नेता नारायण राणे ने विरोध किया कि पाबंदी हर समस्या का समाधान हो सकता।
यह मामला इतना तूल पकड़ा कि मंत्री हतप्रभ रह गए। मुंबई में डांस बार बंदी के मामले में महाराष्ट्र सरकार पिछले साल ही सर्वोच्च न्यायालय में गच्चा खा चुकी है। पर, गृहमंत्री आर.आर.पाटिल की जिद के चलते राज्य सरकार ने अध्यादेश जारी कर एक साल के लिए ़डांस बार पर पाबंदी लगा दी थी।
डांस बार में लगी रोक जुलाई से खत्म
जुलाई महीने में एक साल की समय सीमा समाप्त हो रही है इसलिए पाटिल हमेशा के लिए डांसबार बंद करने की कोशिश में हैं। इसीलिए उन्होंने सोमवार को कैबिनेट की बैठक में डांस बार बंदी के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की।
नारायण राणे ने विरोधी स्वर बुलंद करते हुए कहा कि गृहमंत्री पाटिल हर समस्या के समाधान के लिए पाबंदी लगाने की बात करते हैं। मुंबई सहित आसपास के इलाको में डांस बार पर पाबंदी लगाने से पर्यटन का बहुत नुकसान हुआ है।
लोग आते मुंबई हैं लेकिन जल्द ही यहां से गोवा चले जाते हैं। इससे छोटे-मोटे उद्योग धंधे भी प्रभावित हुए हैं। राणे ने सवाल किया कि जब पंचसितारा (फाईव स्टार) होटलों में डांस बार शुरू हैं तो छोटे-मोटे होटलों में डांस बार पर क्यों पाबंदी लगाई जा रही है।
कानून में ऐसा भेदभाव क्यों?
कानून में ऐसा भेदभाव क्यों? सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से डांस बार बंदी के फैसले को इसी आधार पर गलत करार दिया है कि जब फाईव स्टार होटलों में डांस बार शुरु हो तो छोटे होटलों में पाबंदी क्यों?
समिति तय करेगी डांसबार का भविष्य
कैबिनेट की बैठक में डांसबार की चर्चा जोर पकड़ने पर बीच का रास्ता निकाला गया है। सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल ने फैसला किया है कि गृह, विधि व न्याय और आबकारी विभाग के मंत्री की समिति डांसबार प्रतिबंधक अधिनियम की समीक्षा करेंगे।
इसके बाद सभी दल के नेताओं के साथ चर्चा कर डांस बार के संबंध में कानून बनाने का फैसला करेंगे। इससे अब डांसबार का भविष्य यह समिति ही तय करेगी।