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क्या गैरबिहारी नहीं चला सकता रेल मंत्रालय?

Wed, 04 Jun 2014 03:09 PM IST
अवनीश्ा पाठक
अवनीश्ा पाठक Updated Wed, 04 Jun 2014 03:09 PM IST
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ministry of railway and bihar

संसद भवन में रेलमंत्री का दफ्तर अब 'मनहूस' कहा जाने लगा है। इस दफ्तर से पिछले चार वर्षों में पांच रेल मंत्रियों की छुट्टी हो चुकी है।

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रिश्वतखोरी के आरोपों में फंसे पवन कुमार बंसल टोटके के बाद भी रेलमंत्री की कुर्सी नहीं बचा पाए। इस दफ्तर को अब छठे मंत्री का इंतजार है।
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छठा मंत्री भी यूपीए-2 का कार्यकाल पूरा होने तक अपनी कुर्सी बचा पाएगा, कहा नहीं जा सकता।

पवन कुमार बंसल के इस्तीफे के बाद ये चर्चा आम है कि कोई गैरबिहारी रेल मंत्रालय नहीं चला सकता।

यूपीए-2 में अब तक ममता बनर्जी, दिनेश त्रिवेदी, मुकुल रॉय, सीपी जोशी और पवन कुमार बंसल को रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।

लेकिन ममता बनर्जी और सीपी जोशी को छोड़ सभी को विवादों के चलते मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस की जीत के बाद ममता बनर्जी ने रेल मंत्री पद से इस्तीफा दिया था और राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभाल लिया था।

क्या बंसल मिस्टर क्लीन हैं?
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तृणमूल के यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद पिछले साल अक्टूबर में सीपी जोशी को रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।

जोशी से वापस लेकर ही पवन कुमार बंसल को रेल मंत्रालय की पूर्णकालिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बंसल के इस्तीफे के बाद एक बार फिर रेल मंत्रालय का प्रभार जोशी को ही सौंपा गया है।


बिहार से नहीं यूपीए-2 का एक भी रेलमंत्री

यूपीए-2 में अब तक गैरबिहारियों को ही रेल मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया, जबकि यूपीए-1 में रेल मंत्रालय का प्रभार लालू प्रसाद यादव के पास था। उन्होंने पांच साल तक रेल मंत्रालय चलाया।

लालू समर्थक दावा करते हैं कि लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में ही रेलवे मुनाफे में आया।

लालू के पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के शासन काल में नीतीश कुमार ने चार सालों तक रेल मंत्रालय संभाला। ये दोनों नेता बिहार से हैं।

बंसल के वो सात दिन

पिछले 65 सालों में जगजीवन राम, राम सुभाग सिंह, ललित नारायण मिश्रा और राम विलास पासवान जैसे बिहार से आने वाले नेता रेल मंत्रालय की कमान संभाल चुके हैं।

इनमें से जगजीवन राम ने लगभग छह साल तक रेल मंत्रालय का कार्यभार संभाला। रेलमंत्रालय में ये एक रिकॉर्ड भी है।

बिहार के बाहर के सफल रेल मंत्री

यह संयोग है कि अब तक केवल तीन ही रेल मंत्री पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाए हैं।

ये मंत्री हैं- बाबू जगजीवन राम (7 दिसंबर 1956-10 अप्रैल 1962), सीके जाफर शरीफ (21 जून 1991-16 अक्टूबर 1995) और लालू प्रसाद यादव (23 मई 2004-25 मई 2009)। इन तीन मंत्रियों में दो मंत्री बिहार से हैं।

इनमें सीके जाफर शरीफ ही अपवाद हैं और वे कर्नाटक से हैं। वे पीवी नरसिम्हा राव के कार्यकाल में रेलमंत्रालय का प्रभार संभाल चुके हैं।

इनके अलावा लाल बहादुर शास्त्री, अब्दुल गनी खां चौधरी और माधव राव सिंधिया भी ऐसे गैर बिहारी नेता रहे हैं, जिन्होंने सफलतापूर्वक रेल मंत्रालय संभाला। लेकिन ये कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए।

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