वाह स्मृति! दोषी बिजनेसमैन को बना दिया यूनिवर्सिटी का वीसी
मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से लगातार विवादित चेहरों को ओहदा और सम्मान देने को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं। हैदराबाद की मौलाना आजाद नेशनल यूनिवर्सिटी के नए कुलपति के तौर पर उद्योगपति और परसोली कॉरपोरेशन लिमिटेड के सीईओ जफर सरेशवाला को नियुक्त किया गया है।
इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि सेबी ने जफर की कंपनी को नियमों के उल्लंघन का दोषी ठहराया और पंजीकरण रद्द कर दिया गया।
एक अन्य मामले में भी उनकी कंपनी से जुड़े अधिकारियों पर पूंजी बाजार से सात साल के लिए रोक लगाने की बात थी। आरोप लगाया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीबी के चलते ही उनकी नियुक्ति हुई है।
भाजपा एमएलसी को भी बड़ा सम्मान देने की चर्चा
वहीं एक अन्य मामले में भी मंत्रालय के फैसले पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। भाजपा के पूर्व एमएलसी और भगवा विचारधारा से जुड़े लेखक एसएल भईरप्पा को प्रतिष्ठित नेशनल रिसर्च प्रोफेसर जैसे सम्मान से नवाजने की बात है।
बताया जाता है कि भईरप्पा ने टीपू सुल्तान को धार्मिक कट्टरपंथी बताया था। साथ ही उन्होंने यह कहकर विवाद छेड़ दिया कि भारत के इतिहास को बिना संस्कृत के ज्ञान के समझा नहीं जा सकता। इसी तरह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश त्रिपाठी को लेकर भी हितों का टकराव का मामला सामने आ रहा है।
आरोप लगाया गया है कि त्रिपाठी की नियुक्ति को हरी झंडी देने वाले मंत्रालय की खोज एवं चयन समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गिरिधर मालवीय के त्रिपाठी से पुराने संबंध रहे हैं। इस मामले को लेकर हितों के टकराव का आरोप लगाया जा रहा है। कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।