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अलग तेलंगाना के गठन पर राजी नहीं गृह मंत्रालय
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
Updated Mon, 21 Jan 2013 09:34 PM IST
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गृह मंत्रालय पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के पक्ष में नहीं है। मंत्रालय ने इस हफ्ते होने वाली राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीपीए) की बैठक के लिए तैयार ड्राफ्ट में अपना फैसला दर्ज कर दिया है। आम तौर पर बृहस्पतिवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इसी ड्राफ्ट के आधार पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली सीसीपीए तेलंगाना के भविष्य पर फैसला लेगी।
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इस मसौदे से साफ होता जा रहा है कि दशकों से चले आ रहे पृथक तेलंगाना राज्य के गठन का मामला अब ठंडे बस्ते में बंद होने की कगार पर है। सरकार और कांग्रेस इस फैसले के बाद उठने वाले राजनीतिक बवंडर की काट भी तैयार कर रही है। ड्राफ्ट में लिखा गया है कि पृथक राज्य के गठन से आंध्र प्रदेश के विशिष्ट संस्कृति और भाषा वाले अल्पसंख्यक लोगों पर दूरगामी दुष्प्रभाव पड़ेगा। ड्राफ्ट के जरिए मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया है कि इस तरह के छोटे राज्य का गठन राजनीतिक और आर्थिक लिहाज से तर्कसंगत नहीं है।
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मंत्रालय ने आगाह किया है कि तेलंगाना के गठन के बाद बदले राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियों में नक्सलवाद नए सिरे से पनपेगा। मंत्रालय ने ड्राफ्ट में यह भी लिखा है कि इस मुद्दे पर राजनीति दलों की राय में एकरूपता और साफगोई नहीं है। पिछले कुछ महीनों से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी खुद तेलंगाना के गठन पर सभी पक्षों के बातचीत कर रही थीं। साथ ही पृथक तेलंगाना गठन के लिए बनी जस्टिस श्रीकृष्णा कमेटी रिपोर्ट पर गृह मंत्रालय अलग से सभी राजनीतिक दलों से राय मशविरा कर रहा था।
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सोमवार को इसी मुद्दे पर गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने यूनिफाइड आंध्र संगठन के करीब 20 सांसदों और विधायकों से मुलाकात की। इनके साथ आंध्र प्रदेश के नॉन गजटेड कर्मचारी यूनियन के करीब 50 प्रतिनिधि भी थे। मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि इन्होंने राज्य के 10 लाख कर्मचारियों के विरोध से केंद्र को आगाह किया है।