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'खाने की वस्तुओं पर सिर्फ एक्सपायरी डेट हो, ‘बेस्ट बिफोर’ नहीं'

Mon, 28 Dec 2015 01:44 AM IST
Updated Mon, 28 Dec 2015 01:44 AM IST
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Minister of Consumer Affairs, Food and Public Distribution of Ram Vilas Paswan give statement on goods

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं जन वितरण प्रणाली मंत्री राम विलास पासवान ने रविवार को कहा कि खाद्य चीजों के लेबल पर सिर्फ ‘एक्सपायरी की तरीख’ होनी चाहिए न कि ‘बेस्ट बिफोर’ जिसका कोई मतलब नहीं है। पासवान ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि सिर्फ ‘एक्सपायरी की तारीख’ हो। ‘बेस्ट बिफोर’ का कोई मतलब नहीं है।’

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उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के उपायों पर काम करने के लिए वह विभाग की बैठक बुलाएंगे। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के अध्यक्ष डीके जैन ने पिछले हफ्ते कहा था कि खाद्य चीजों के लेबल को लेकर उपभोक्ता उलझन में पड़ जाते हैं और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को एक्सपायरी की तारीख और बेस्ट बिफोर जैसे लेबलिंग के मसले पर गौर करना चाहिए।
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जैन ने कहा था कि उन्हें आश्चर्य है कि बेस्ट बिफोर लेबल का मतलब यह होता है कि छह महीने के बाद भी उत्पाद लोगों द्वारा खपत के योग्य है।

भारत, पाक और बांग्लादेश एक महासंघ बन सकते हैं

Minister of Consumer Affairs, Food and Public Distribution of Ram Vilas Paswan give statement on goods

पासवान ने कहा कि सरकार नेशन एसोसिएश्न ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया के साथ चर्चा कर रहीं है साथ ही शहरों के कुछ खास स्थानों को ऐसे खाद्य पदार्थ बेचने के लिए चिह्नित कर रही है। उन्होंने कहा कि स्ट्रीट फूड बेचने के लिए हम एक प्रणाली चाहते हैं। हम चाहते हैं कि एक खास स्थान पर स्ट्रीट फूड की बिक्री की जाए।

केंद्रीय मंत्री पासवान ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एक मुद्रा और खुले व्यापार वाले एक महासंगठन बनने का समर्थन किया है। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से आतंकवाद पर अंकुश लगा कर उसे समाप्त करने में मदद मिलेगी। पासवान ने कहा, ‘हम यह नहीं कह सकते कि ये फिर से एक हो सकते हैं या नहीं।

अगर ये (तीनों देश) एक हो जाते हैं तो अच्छी बात होगी। अगर वे एक राष्ट्र फिर से नहीं बन सकते तो कम से कम महासंगठन बन सकते हैं। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश सभी एक ही राष्ट्र में थे।’ उल्लेखनीय है कि आरएसएस से भाजपा में शामिल हुए राम माधव ने हाल ही में बयान दिया था कि एक दिन ये तीनों देश युद्ध के जरिये नहीं बल्कि आपसी सहमति के आधार पर फिर से एक होंगे।

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