पाक में फिर हो सकता है सैन्य तख्तापलट
पाकिस्तान में एक बार फिर सैन्य तख्तापलट हो सकता है। पाक सीनेट के प्रमुख रजा रब्बानी ने यह अंदेशा जताया है। रब्बानी ने आगाह किया है कि यदि इसे रोकने के लिए संविधान का कड़ाई से पालन अथवा इसमें जरूरी बदलाव नहीं किए गए तो फौज कभी भी सरकार का तख्ता पलट सकती है। रब्बानी ने यह बात अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के मौके पर मंगलवार को कही।
पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट की कई घटनाएं हो चुकी हैं। मुल्क के आजाद होने के 68 बरस बाद आधे समय तक पाकिस्तान में फौज की हुकूमत रही है। विपक्षी नेताओं ने पाकिस्तान की ताकतवर फौज और सरकार के बीच बढ़ते अलगाव को लेकर आशंका जताई थी।
विगत में पाकिस्तानी फौज सीधे शासन करने के लिए चार बार चुनी हुई सरकार को अपदस्थ कर चुकी है। पाकिस्तान में अनुच्छेद छह के बावजूद फौज की दखलंदाजी जारी रही है। इस अनुच्छेद में संविधान को रद्द करने को राजद्रोह का अपराध माना गया है। इसके लिए मौत की सजा का प्रावधान है।
पाक के आखिरी सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ थे। मुशर्रफ ने 1999 में सत्ता संभाली थी लेकिन 2008 में उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा था। मुशर्रफ के खिलाफ 2013 में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था।
'एक और सैन्य हस्तक्षेप नहीं झेल सकता मुल्क'
रब्बानी ने कहा, ‘मेरा मानना है कि अनुच्छेद छह अब बेमानी हो गया है। अब संविधान का कोई प्रावधान लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर सकता। जनता ही फौज को हुकूमत पर काबिज होने से रोक सकती है। पाक एक और सैन्य हस्तक्षेप नहीं झेल सकता। लोकतंत्र के अलावा कोई अन्य व्यवस्था संघ को यथावत नहीं रख सकती।’
पाक में सैन्य शासन
:- 1956 में जनरल इस्कन्दर मिर्जा पाक के पहले राष्ट्रपति बने, 1958 में जनरल अयूब खान ने शासन अपने हाथ में ले लिया।
:- 1969 में आर्मी चीफ याह्या खान ने तख्तापलट कर सत्ता हथियाई।
:- बांग्लादेश के उदय के बाद याह्या को सत्ता भुट्टो को सौंपनी पड़ी।
:- 1977 में जनरल जिया उल हक ने मार्शल लॉ के सहारे भुट्टो को हटाया और 1979 में उन्हें फांसी दे दी।
:- 1999 में मुशर्रफ ने शरीफ को बेदखल कर सत्ता पर कब्जा जमाया। 2008 में छोड़ा पद।