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सीमा पर रहस्यमयी उड़नतश्तरियों ने बढ़ाई सेना की चिंता

Tue, 06 Nov 2012 01:57 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 06 Nov 2012 01:57 PM IST
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military concerns raised by the mysterious ufos on indo - china border

भारत और चीन की सीमा पर पिछले कुछ समय से अज्ञात उड़नतश्तरियों (यूएफओ) की बाढ़ सी आ गई है। सुरक्षा तंत्र ने उड़नतस्तरियों की बढ़ती उड़ान पर चिंता जताई है। चीन के साथ लगी उत्तरी सीमा पर तैनात सेना की 14वीं कोर ने सरकार को इस बाबत रिपोर्ट भी भेजी है। रिपोर्ट में इनकी पहचान पर तकनीकी खुफिया एजेंसियों की क्षमताओं पर सवाल भी उठाए गए हैं।

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सेना के सूत्रों ने बताया कि 14वीं कोर की रिपोर्ट में कहा गया है कि लद्दाख क्षेत्र में सीमावर्ती इलाके में दिन और रात के वक्त अज्ञात उड़नतश्तरियों की गतिविधियां देखी गई हैं। रडार व अन्य निगरानी उपकरण इनकी पहचान का कोई भी निशान पकड़ने में नाकाम रहे।
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यहां तक कि किसी धातु के भी निशान रडार पर नहीं मिल सके। इस मामले में राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की विशेषज्ञ टीमों से मदद मांगी गई, लेकिन वे भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे।
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सूत्र बताते हैं कि बीते तीन महीनों के दौरान इस तरह की सौ से ज्यादा घटनाएं सीमा पर तैनात सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की टुकडि़यों ने रिपोर्ट की हैं। खास तौर पर पेंगोंग त्सो झील के पास इनकी सक्रियता अधिक है। बताया जाता है कि चीनी इलाके से उठने के बाद रात के वक्त रोशनी का गोला काफी ऊंचाई पर हवा में तैरता देखा गया और फिर गायब हो गया।

सूत्रों के अनुसार इनका आकार-प्रकार मानवरहित टोही विमानों (यूएवी) से अलग है। वैसे भारतीय तैयारियों की टोह में चीनी टोही विमान अक्सर भारतीय सीमा के करीब आते रहे हैं। इस साल जनवरी से अगस्त के बीच जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर क्षेत्र में 90 से अधिक बार यूएवी देखे गए, लेकिन ये रहस्यमय उड़नखटोले इनसे अलग हैं।

सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक अज्ञात उड़नखटोलों का रडार की पकड़ में न आना न केवल चिंता की बात है, बल्कि तकनीकी कमजोरियों का भी निशान है। इसे चीन की ओर से भारत की सैन्य तैयारियों की टोह लेने के लिए भेजे गए हवाई मिशन के तौर पर भी देखा जा रहा है। वैसे यह पहला मौका नहीं जब इस इलाके में उड़नतश्तरियां देखे जाने की बात सामने आई है।


2010 में इसी तरह की खबरों पर वायुसेना ने अपनी जांच में भारतीय आसमान में ऐसी किसी भी उड़ने वाली वस्तु की मौजूदगी से इनकार करते हुए उन्हें चीनी लालटेन करार दिया था। सेना ने 2003 में भी इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट सेना मुख्यालय को भेजी थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था।

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