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मिग को उड़न ताबूत कहना गलत: वायु सेना प्रमुख
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Sat, 06 Oct 2012 08:36 PM IST
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वायु सेना प्रमुख एन ए के ब्राउन ने कहा है कि मिग बेहतरीन लड़ाकू विमान हैं और इन्हें उड़ते हुए ताबूत की संज्ञा देना उचित नहीं है। एयर चीफ मार्शल ने वायु सेना की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर एक इंटरव्यू में कहा कि पायलटों के लिए मध्यम श्रेणी के जेट ट्रेनरों के अभाव तथा वायु सेना में बड़ी संख्या में मिग विमान के होने की वजह से दुर्घटनाओं के आंकडे़ में इनकी संख्या ज्यादा है लेकिन इस वजह से इन्हें उड़न ताबूत कहना सही नहीं है।
ये बहुत ही शानदार विमान हैं।
वायु सेना में इसकी 12 से 15 स्क्वाड्रन हैं और ऐसे में जब कोई हादसा होता है तो वह मिग 21 ही निकलता है, जिसकी वजह से इसे बदनामी मिल गई। उन्होंने कहा यकीन मानिए ये बहुत खूबसूरत मशीन है। वैसे आंकडे़ कुछ और ही कहते हैं। पिछले चार साल में 33 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए जिनमें 27 विमान विभिन्न प्रकार के मिग विमान थे। इन हादसों में 13 जांबाज पायलटों की जान भी गई।
वायु सेना प्रमुख ने मिग विमानों का बचाव करते हुए कहा कि ये विमान पिछले 50 साल से देश की सेवा कर रहे हैं और 1965 से लेकर 1971 की जंग में हिस्सा लिया। उन्होंने माना कि हॉक जेट ट्रेनर आने में 25 साल लग गए और ऐसे में मिग 21 विमानों को ही प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
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पायलटों को प्रशिक्षित करने की चुनौतियों के बारे में एयर चीफ मार्शल ने कहा कि ढाई साल तक बेसिक ट्रेनर एचपीटी 32 ग्राउंडेड रहे। अब जाकर पिलाटस बेसिक ट्रेनरों का सौदा हुआ है और इनकी सुपुर्दगी अगले साल फरवरी से शुरू हो जाएगी।
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ये बहुत ही शानदार विमान हैं।
वायु सेना में इसकी 12 से 15 स्क्वाड्रन हैं और ऐसे में जब कोई हादसा होता है तो वह मिग 21 ही निकलता है, जिसकी वजह से इसे बदनामी मिल गई। उन्होंने कहा यकीन मानिए ये बहुत खूबसूरत मशीन है। वैसे आंकडे़ कुछ और ही कहते हैं। पिछले चार साल में 33 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए जिनमें 27 विमान विभिन्न प्रकार के मिग विमान थे। इन हादसों में 13 जांबाज पायलटों की जान भी गई।
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वायु सेना प्रमुख ने मिग विमानों का बचाव करते हुए कहा कि ये विमान पिछले 50 साल से देश की सेवा कर रहे हैं और 1965 से लेकर 1971 की जंग में हिस्सा लिया। उन्होंने माना कि हॉक जेट ट्रेनर आने में 25 साल लग गए और ऐसे में मिग 21 विमानों को ही प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
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पायलटों को प्रशिक्षित करने की चुनौतियों के बारे में एयर चीफ मार्शल ने कहा कि ढाई साल तक बेसिक ट्रेनर एचपीटी 32 ग्राउंडेड रहे। अब जाकर पिलाटस बेसिक ट्रेनरों का सौदा हुआ है और इनकी सुपुर्दगी अगले साल फरवरी से शुरू हो जाएगी।