कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान में मिडिल क्लास गायब, नेता नाखुश
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लोकसभा चुनाव के लिए 6 चरण का मतदान हो चुका है। बचे 3 चरणों से ठीक पहले अब कांग्रेस को अपने चुनाव प्रचार अभियान से मध्य वर्ग के गायब होने की याद आ रही है।
मध्य वर्ग को चुनाव प्रचार से गायब कर देने को लेकर चुनावी रणनीति पर पार्टी के अंदर ही सवाल उठने लगे हैं।
पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए हाईकमान से इसकी शिकायत भी की है। पार्टी का चुनाव अभियान किसान, मजदूर और गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों की ही बात करता नजर आता है।
हाईकमान से बताई नेताओं ने अपनी समस्या
प्रचार अभियान में मध्य वर्ग को शामिल नहीं करने के मसले पर पार्टी बंटी दिख रही है। पार्टी के कई नेताओं ने चुनावी विज्ञापनों में मध्य वर्ग को तवज्जो नहीं देने पर नाखुशी जाहिर की है।
इन नेताओं ने अपनी बात हाईकमान के सामने भी रखी है। पार्टी के इस धड़े का मानना है कि मध्य वर्ग पर असर डालने वाले महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पार्टी के चुनाव अभियान में खास ध्यान नहीं दिया गया।
साथ ही पार्टी नेता इन मुद्दों को अपनी चुनावी रैलियों में भी उठाने से बच रहे हैं, ऐसे में मध्य वर्ग के बीच सही संदेश नहीं जा रहा है।
मध्य वर्ग यूपीए से सबसे ज्यादा नाराज
वहीं दूसरी ओर चुनाव प्रचार से जुड़े मैनेजर पार्टी के चुनाव प्रचार का बचाव कर रहे हैं।
उनका तर्क है कि चुनाव से पहले पार्टी को रिपोर्ट मिली थी कि मध्य वर्ग केंद्र सरकार से सबसे ज्यादा नाराज है। इसलिए उस पर ध्यान केंद्रित करने की जगह पार्टी की सामाजिक योजनाओं से जुड़े लोगों पर ही फोकस करने की रणनीति बनाने की बात हुई थी।
रणनीतिकार कहते हैं कि पार्टी का प्रचार अभियान किसी एक वर्ग नहीं बल्कि विभिन्न वर्गों के समूहों को फोकस करते हुए बनाया गया है। पार्टी के अंदरखाने मध्य वर्ग को नजरअंदाज करने को लेकर नाराजगी है लेकिन नेता इसे खुलकर स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
चुनावी लाभ होता न देख भुलाया
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि मध्य वर्ग यूपीए सरकार से सबसे ज्यादा नाराज है। ऐसे में मध्य वर्ग के लिए कुछ भी किया जाए, उससे कोई चुनावी फायदा नहीं होने वाला है।
इसी को देखते हुए चुनाव अभियान में इस वर्ग पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। पार्टी के एक वर्ग को आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि यूपीए सरकार की नीतियां वैसे भी मध्य वर्ग को लेकर कोई खास नहीं रही हैं, इसके बावजूद कांग्रेस ने चुनाव में मध्य वर्ग को लुभाने की बात तक नहीं की, जोकि उचित नहीं है।
भाजपा का ध्यान मध्य वर्ग पर
उधर, भाजपा अपने चुनाव प्रचार अभियान में महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है, जोकि सबसे ज्यादा मध्य वर्ग पर असर डालते हैं।
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का चुनावी नारा ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ खासतौर से मध्य वर्ग को ही ध्यान में रखकर बनाया गया है। जिसका कांग्रेस अभी तक जवाब ही नहीं ढूंढ पाई है।
"राहुल गांधी कई बार कह चुके हैं कि उनका लक्ष्य उन 70 करोड़ लोगों को मध्य वर्ग में लाने का है जोकि गरीबी रेखा के नीचे और मध्य वर्ग के बीच में आते हैं। यूपीए सरकार 14 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाई है। इसलिए मध्य वर्ग को नजरअंदाज करने की बात ठीक नहीं है।"
---शकील अहमद, कांग्रेस महासचिव