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सेहत सुधारने अब नए कलेवर में आएगा मिड-डे मील
नई दिल्ली/यशवर्धन शुक्ला/पीयूष पांडेय
Updated Fri, 28 Jun 2013 12:09 AM IST
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बच्चों में कुपोषण को लेकर दुनिया भर में खराब हुई भारत की सेहत को सुधारने के लिए सरकार मिड-डे मील को स्कूलों में नए कलेवर में पेश करने का फैसला लिया है।
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केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने खाने की गुणवत्ता बेहतर करने के मानव संसाधन मंत्रालय के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
देशभर में स्कूली बच्चों को पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन मुहैया कराने की जुगत में भारतीय होटल प्रबंधन के मास्टर शेफ इस योजना के तहत खाना बनाने वाले 24.58 लाख बावर्चियों को कई चरणों में विशेष प्रशिक्षण देंगे ताकि खाने की गुणवत्ता को लेकर होने वाली शिकायतों को दूर किया जा सके।
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इस योजना की तकनीकी खामी को दूर कर सरकार देश के 12.18 लाख स्कूलों में 10.52 करोड़ विद्यार्थियों को पौष्टिक एवं लजीज खाना मुहैया कराएगी।
मंत्रालय के मुताबिक जमीनी स्तर पर योजना के तहत स्कूलों में मुहैया कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को सुधारने के लिए यह निर्णय लिया गया है ताकि बच्चों के साथ देश की सेहत सुधारी जा सके। बच्चों की सेहत को लेकर बिगड़ी भारत की छवि को विदेशों में सुधारना भी सरकार का एक उद्देश्य है।
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पर्यटन मंत्री चिरंजीवी ने कहा कि इस योजना के तहत करीब 25 लाख बावर्चियों को प्रशिक्षण दिए जाने का मकसद बच्चों को अच्छा खाना मुहैया कराना है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बावर्चियों को देसी ही नहीं विदेशी व्यंजन बनाने के गुर भी सिखाए जाएंगे।
इससे मिड-डे मील योजना के भोजन में तो सुधार आएगा ही, साथ ही बावर्चियों को भविष्य में अन्य जगह रोजगार मिलने में परेशानी नहीं आएगी।
मंत्रालय के अनुसार योजना में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभिक शिक्षा के संयुक्त सचिव की देर-रेख में शुरू किया जाएगा। इस में होटल प्रबंधन संस्थानों के प्राचार्य भी प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू कराने में जिम्मेदारी निभाएंगे।
2013-14 के पहले चरण में 600 बावर्चियों को दस दिनों के कोर्स में अच्छा, स्वच्छ, स्वादिष्ट और लजीज भोजन तैयार करने के गुर सिखाए जाएंगे। हालांकि इस प्रशिक्षण को हासिल करने के लिए बावर्ची का आठवीं पास होना जरूरी है।