{"_id":"5c1722263273832d17511bbadbb64204","slug":"mid-day-meal-tragedy-school-principal-guilty","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिड-डे-मीलः केंद्र सरकार ने भी माना प्रिंसिपल को दोषी","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
मिड-डे-मीलः केंद्र सरकार ने भी माना प्रिंसिपल को दोषी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2013 10:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिहार के छपरा जिले में मिड-डे-मील खाने से 23 बच्चों की मौत के मामले में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा कराई गई जांच में भी स्कूल की मुख्य शिक्षिका को घटना का दोषी पाया गया है।
विज्ञापन
केंद्र ने इस जांच रिपोर्ट की एक प्रति बिहार सरकार को भी भेजी है। रिपोर्ट में राज्य सरकार को ऐसी घटनाओं को होने से रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि मानव संसाधन मंत्रालय ने इस हादसे की जांच के लिए अतिरिक्त सचिव अमरजीत सिंह को मामले की जांच सौंपी थी।
जांच रिपोर्ट में उन्होंने बिहार में मिड-डे-मील योजना की प्रगति की तारीफ करने के साथ ही उन तमाम खामियों का भी जिक्र किया है जिन्हें जल्द से जल्द दूर किए जाने की जरूरत है।
विज्ञापन
घटना के लिए उन्होंने सीधे स्कूल की मुख्य शिक्षिका की लापरवाही को वजह बताया है। उनके अनुसार खाना पकाने वाली महिला ने जब तेल में गड़बड़ी की शिकायत की तो उसे शिक्षिका ने डांटते हुए कहा कि यह उनके घर से आया तेल है।
इसी तरह जब बच्चों के खाने के खराब स्वाद की शिकायत की तो भी शिक्षिका ने अनदेखी करते हुए खुद खाना नहीं चखा। रिपोर्ट में शिक्षिका की घोर लापरवाही तो मानी गई है किंतु किसी तरह की साजिश होने की बात नहीं कही गई है।
घटना के मद्देनजर रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सभी स्कूलों में जल्द से किचन कम स्टोर बनना चाहिए। रिपोर्ट में स्कूलों में खाना बनाने वालों को जिला स्तर पर प्रशिक्षण भी दिए जाने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिक्षकों तथा अन्य स्टाफ को जरूरी मेडिकल प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। यदि घटना के दिन बच्चों को नमक युक्त पानी पिला दिया जाता तो वे तुरंत विषाक्त खाना उलटी कर देते। इससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
इलाज में देरी के चलते ही 23 बच्चों को जान गंवानी पड़ी। रिपोर्ट में विस्तृत एक्शन प्लान के सुझाव के साथ यह भी कहा गया है कि अगले महीने 22 से 31 अगस्त के बीच राज्य के साथ मिलकर मंत्रालय पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा करेगा।
मिड डे मील से 10 लाख स्कूली बच्चे वंचित
इधर बिहार में लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को 4600 से अधिक स्कूलों के करीब दस लाख बच्चों को मिड डे मील नहीं परोसा गया। प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों द्वारा मिड डे मील संबंधी अपनी ड्यूटी का बहिष्कार करने की वजह से बच्चे भोजन से वंचित रहे।
बिहार मिड डे मील स्कीम के निदेशक आर लक्षमनान ने कहा कि हमारी रिपोर्ट के अनुसार पूरे राज्य में 70 हजार स्कूलों में मिड डे मील दिया जाता है। लेकिन शिक्षकों के बहिष्कार से इनमें से लगभग 4600 से अधिक स्कूलों के करीब दस लाख बच्चों को भोजन नहीं दिया गया।
शिक्षा विभाग के सूत्रों ने कहा कि सारन, पूर्णिया, श्योहर और अररिया जिलों के अधिकांश स्कूलों में बच्चों को भोजन आपूर्ति में बाधा रही। उल्लेखनीय है कि गत दिनों सारन जिले में जहरीला मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत हो गई थी।