{"_id":"d600c36ec4f3e7ff3bfea88cc3de48fe","slug":"mers-virus-may-attack-india-through-mumbai","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुंबई के रास्ते देश पर हो सकता है वायरस अटैक, हज जाने वाले सतर्क","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
मुंबई के रास्ते देश पर हो सकता है वायरस अटैक, हज जाने वाले सतर्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 22 Jul 2013 04:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत में मध्य एशिया से मिडिल ईस्ट रेसपिरेटरी सिंड्रोम (एमईआरएस) वायरस के फैलने की आशंका जताई गई है। इस साल हज या अन्य कारणों से मध्य एशिया के देशों की यात्रा पर जाने वालों के इस वायरस से संक्रमित होने की आशंका जताई गई है।
विज्ञापन
टोरंटो में सेंट माइकल अस्पताल के वैज्ञानिकों ने शनिवार को यह चेतावनी दी है कि एसएआरएस वायरस की तरह ही एमईआरएस वायरस भी फैल सकता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा भारत में बना हुआ है।
विज्ञापन
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में आने वाले बड़े मौकों पर इस संकट के बढ़ने की ज्यादा आशंका है। तब लाखों की संख्या में मध्य एशिया जाने वाले लोग इस वायरस प्रभावित हो सकते हैं।
विज्ञापन
इस टीम के मुताबिक भारत में यह खतरा और अधिक इसलिए है क्योंकि भारत में इस वायरस को पहचानने और उसकी रोकमथाम की क्षमता बहुत कम है।
इस वायरस से बुखार, निमोनिया, सांस लेने में दिक्कत और खांसी जैसे दिक्कतें हो सकती हैं और जान का भी खतरा है।
हज पर जाएंगे लाखों लोग
आने वाले दो त्योहारों पर मुसलिम समुदाय के लाखों लोग मध्य एशिया जाएंगे। अनुमान है कि करीब 1.7 लाख भारतीय मुसलमान इस साल हज के लिए जा सकते हैं।
अगर ये लोग मध्य एशिया के देशों में जाकर इस वायरस से प्रभावित होते हैं तो वापस लौटने पर वह भारत में भी फैल सकता है।
भारत में मुंबई और कोझिकोड से इस वायरस के आने की ज्यादा आशंका है क्योंकि यहां से मध्य एशिया जाने वाले अधिकतर लोग हवाई यात्रा करते हैं।
पिछले साल भारत में आए अधिक लोग
इससे पहले पिछले साल 2012 में भी जो लोग भारत आए उनके इस वायरस से प्रभावित होने की आशंका है।
एमईआरएस वायरस के वर्ष 2012 की शुरूआत में मध्य एशिया में पाए जाने की बात सामने आई थी। वहां से इसके पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अफ्रीका में भी फैलने का पता चला है।
वैज्ञानिकों की इस टीम के अनुसार सऊदी अरब, जोर्डन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात से पिछले साल जून से नवंबर 2012 के बीच 1.68 करोड़ लोग गए थे। यह लोग आठ देशों में वापस गए जिनमें से भारत में 16.3%, मिस्र 10.4%, पाकिस्तान 7.8%, ब्रिटेन 4.3%, कुवैत 3.6%, बांग्लादेश 3.1% और ईरान 3.1% पहुंचे।