मेमन: एक उम्दा चार्टर्ड एकाउंटेंट से अपराध जगत तक का सफर
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याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन की कहानी एक उम्दा चार्टर्ड एकाउंटेंट से शुरू होकर एक खूंखार अपराधी के रूप में समाप्त होती है। याकूब का बचपन दक्षिण मुंबई के भायखला और भिंडी में गुजरा था।
1980 के दशक में पूरा मेमन परिवार माहिम की मच्छीमार कालोनी के एक ट्रांजिट कैंप में चला गया। उसके बाद माहिम के अल हुसैनी इमारत में शिफ्ट हो गया।
12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के चंद घंटे पहले तक मेमन परिवार का यही ठिकाना था। मेमन परिवार का मुखिया अब्दुल रज्जाक था।
घर का सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा शख्स
उसके साथ पत्नी हनीफा और छह बेटे आरिफ उर्फ सुलेमान, इब्राहिम उर्फ मुस्ताक
उर्फ टाईगर, याकूब, अयूब, अंजुम और युसूफ रहते थे।30 जुलाई 1962 में
भायखला में जन्मा याकूब मेमन परिवार में सबसे अधिक पढ़ा
लिखा शख्स था।
उसने भायखला के एंटोनियो डिसोजा हाईस्कूल से मैट्रिक पास की
और बुरहानी कालेज ऑफ कामर्स एंड आर्ट से स्नातकोत्तर किया। सन 1990 में
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया से सीए की डिग्री प्राप्त
करने के बाद 1991 में अपने बचपन के दोस्त चेतन मेहता के साथ मेहता एंड मेमन
एसोसिएट्स नामक फर्म शुरू की।
यह फर्म बहुत अच्छा काम करती थी। इसलिए
यहां इनकम टेक्स, सेल टेक्स, ऑडिट व एकाउंट मैनेजमेंट से जुड़े लोग आते थे।
थोड़े दिन के बाद उसने अपने पिता के नाम पर एआर एंड संस के नाम से अलग
फर्म खोला।
मेमन की थी अहम भूमिका
इस दौरान उसे बेस्ट चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ ईयर का सम्मान मिला।
इसके अलावा याकूब, तिजरत इंटरनेशनल नामक एक्सपोर्ट एजेंसी के माध्यम से
मध्य एशिया और फारस की खाड़ी (अरब देश) में बीफ का भी निर्यात करता
था।
याकूब जहां बिजनेस में पूरी तरह व्यस्त था। वहीं उसका बड़ा भाई और 1993
बम धमाके का मुख्य मास्टरमाइंड टाईगर मेमन मुंबई का बड़ा तस्कर बन चुका था।
वह दाऊद इब्राहिम के साथ हर जुर्म की दुनिया में पैठ जमा चुका था।
कहा
जाता है कि टाईगर मेमन की सारी काली कमाई सिर्फ याकूब मेमन को ही पता थी।
छह दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद के ढहने की पृष्ठभूमि में
मुंबई में भड़के दंगे के बाद बदले की भावना से मुंबई को दहलाने की जो साजिश
रची गई थी उसमें याकूब मेमन ने अहम भूमिका निभाई थी।
यही नहीं बम प्लांट
कराने से लेकर 15 लोगों को प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने तक की सारी
जिम्मेदारी को याकूब ने बखूबी अंजाम भी दिया था।
इस तरह से कसा शिकंजा
मुंबई बम धमाका मामले में साबीआई का अप्रूवर बना टाईगर मेमन का दोस्त मोहम्मद उस्मान जन खान के बयान से याकूब पर कानून का शिकंजा कस गया।
खान ने कोर्ट को बताया कि दो फरवरी 1993 को जब वह अपने एक साथी जावेद चिकना के साथ टाईगर मेमन से मिलने अल हुसैनी बिल्डिंग में गया तो वहां टाईगर के साथ याकूब भी बैठा था।
वहां टाईगर ने याकूब से जावेद चिकना को दुबई भेजने के लिए छह टिकट दिलाने को कहा और याकूब ने यह काम तत्काल कर दिया था।
दाऊद के इशारे पर हुई साजिश
जिन लोगों को पाकिस्तान में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था उसमें खान भी था। जब वे सभी पाकिस्तान से दुबई के रास्ते चार मार्च 1993 को मुंबई वापस लौटे
तब अन्य लोगों के साथ याकूब भी उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट गया था।
उसी दिन
होटल ताज में इनकी बैठक हुई थी। बैठक में तय की गई रणनीति के मुताबिक दाऊद
इब्राहिम और टाईगर मेमन के इशारे पर मुंबई में बम धमाके कराए गए।
धमाके से
पहले मेमन परिवार कराची चला गया था। वहीं 1993 के मुंबई बम धमाकों के पीड़ितों के परिवार वालों ने भी याकूब मेमन को फांसी पर लटकाने की मांग की है। उन्होंने इस बाबत
याकूब को फांसी पर लटकाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सामूहिक हस्ताक्षर वाला ज्ञापन सौंपा।इन
धमाकों में अपनी मां को खोने वाले तुषार देशमुख ने फडणवीस को दिए गए पत्र
में कहा गया है, ‘याकूब को फांसी पर लटकाया जाना चाहिए।’
देशमुख ने कहा कि
इन धमाकों के चलते कई परिवारों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। हम मौत
की सजा दिए जाने की मांग करते हैं।उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को सौंपे
गए ज्ञापन में 1660 परिवारों ने दस्तखत किए हैं।