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आज भी अनशन पर बैठे शहीद हेमराज के परिजन

Sun, 13 Jan 2013 04:00 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sun, 13 Jan 2013 04:00 PM IST
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members of hemraj family sat on fast again today

पाकिस्तानी हमले में शहीद हुए लांसनायक हेमराज के परिजन रविवार को दोबारा अनशन पर बैठ गए। हालांकि मथुरा के सांसद हेमंत चौधरी ने दोपहर बाद उनका अनशन तुड़वा दिया। परिजन अनशन तोड़ने के बाद भी हेमराज का सिर लाने की मांग पर अड़ें हैं। वे शनिवार को हेमराज की अंत्येष्टि के साथ ही उसके सिर को लाने की मांग को लेकर अनशन पर बैठ गए थे। इस अनशन में अन्य गांववाले भी उनके साथ थे। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की बेरुखी से दुखी हेमराज के परिजन आज फिर अनशन पर बैठ गए थे।

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इससे पहले शनिवार को ग्रामीणों ने दस सूत्रीय मांगों में शहीद का सिर का लाने की मांग फिर से प्रमुखता के साथ अनशन पर बैठे ग्रामीणों ने उठाई। कल देर शाम जब मुख्यमंत्री कार्यालय से एक अधिकारी ने प्रधान के साथ बात की और ग्रामीणों की मांगों को पूरा करने का आश्वासन, इसके बाद ग्रामीणों की भूख हड़ताल समाप्त की।
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ग्रामीणों और शहीद के परिवारीजनों के अंत्येष्टि स्थल पर अनशन शुरू करने की खबर मिलते ही प्रशासन में खलबली मच गई और एसडीएम अनिल मिश्रा और सीओ राजेंद्र यादव मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के साथ वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पहुंचने पर ही वह अपना अनशन खोलेंगे। मुख्यमंत्री और केंद्र के किसी मंत्री के संवेदना जताने नहीं आने से ग्रामीण नाराज थे। साथ ही शहीद का सिर लाने की मांग उठा रहे थे।
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इसके अलावा उनकी दस सूत्रीय मांगों में चिता स्थल पर शहीद स्मारक एवं पार्क बनाने, गांव में राजकीय महाविद्यालय खोलने, मृतक आश्रितों को पांच हेक्टेयर कृषि जमीन देने, शहीद के एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने, शहीद हेमराज सिंह को अशोक चक्र या वीरता पुरस्कार देने, कोसी- शेरनगर मार्ग और शहीद हेमराज द्वार का निर्माण कराने, आश्रितों को निशुल्क शिक्षा, शहीद के परिवारीजनों को गैस एजेंसी या पेट्रोल पंप आवंटित करने तथा केन्द्र सरकार से 30 लाख की सहायता राशि दिलाने की मांग ग्रामीण कर रहे थे।


प्रधान धर्मवीर सिंह ने बताया कि एसडीएम और सीओ ने देर शाम मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात एक अधिकारी से बात कराई है तथा उन्होंने राज स्तरीय मांगों को मानने तथा केंद्र से संबंधित मांगों पर संस्तुति कर केंद्र सरकार को भेजने की बात कही है, इसके बाद भूख हड़ताल समाप्त कर दी गई।

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