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छेदी से नहीं मोदी से मुकाबला करेंगी मीरा कुमार

Thu, 03 Apr 2014 12:46 PM IST
विनोद अग्निहोत्री/सासाराम(बिहार)
विनोद अग्निहोत्री/सासाराम(बिहार) Updated Thu, 03 Apr 2014 12:46 PM IST
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Meira kumar's competition is not with Chedi but Modi

दलित राजनीति के जाने-माने स्तंभ रहे पूर्व उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम के कर्म क्षेत्र सासाराम में उनकी बेटी और लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार फिर मैदान में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मीरा का मुकाबला अपने प्रतिद्वंदी छेदी से नहीं बल्कि मोदी से है। क्योंकि भाजपा ने जनता दल(यू) से दल बदल करके आए जिन छेदी पासवान को यहां से मैदान में उतारा है।

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उन्हें भाजपा का जनाधार माने जाने वाले सवर्ण मतदाता भी पसंद नहीं कर रहे हैं। लेकिन वह अगर भाजपा उम्मीदवार को वोट देंगे तो सिर्फ नरेंद्र मोदी को देश की कमान सौंपने के लिए। इस लिए यहां बच्चे-बच्चे की जबान पर यही बात है।
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कैमूर की पहाडिय़ों से घिरे बिहार के इस जाने-माने लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार हैं, जिनके मुकाबले में भाजपा ने कई बार दल बदल कर चुके पूर्व सांसद और मौजूदा विधायक छेदी पासवान को और जनता दल(यू) ने पूर्व आईएएस के.पी. रमैया को मैदान में उतारा है। बिहार में कांग्रेस दस सीटों पर लड़ रही है और सासाराम उसकी सबसे मजबूत सीटें मानी जा रही है।
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कांग्रेसियों को है जीत ‌का भरोसा

Meira kumar's competition is not with Chedi but Modi

सासाराम क्षेत्र के ही मोहनिया में मीरा कुमार के पति मंजुल कुमार से मुलाकात होती है। एक स्थानीय होटल में बैठकर मंजुल मीरा कुमार का पूरा चुनाव अभियान खुद संचालित कर रहे हैं। मतदाता सूचियों के ढेर में उलझे मंजुल बताते हैं कि मीरा तो निरंतर क्षेत्र में सघन चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं।

इसके आगे वह कुछ नहीं कहते लेकिन होटल में मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ता दावा करते हैं कि मैडम की जीत तो पक्की है अब यह तय होना है कि दूसरे नंबर पर कौन रहेगा। बिहार सरकार द्वारा हरित शहर(ग्रीन सिटी) के रूप में घोषित मोहनिया उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित शहर है, जिसकी ज्यादातर इमारतें हरे रंग से पुती हुई हैं।

शहर में नरेंद्र मोदी का वीडियो रथ घूम रहा है,लेकिन मोहनिया केलोग अपने कामकाज में व्यस्त दिखे। पूछने पर ज्यादातर ने कहा कि मोदी का असर तो है और भाजपा उम्मीदवार छेदी पासवान इसी वजह से मुकाबले में आ गए हैं, लेकिन मीरा कुमार का पलड़ा भारी है।

भाजपा की भी जीत की उम्मीद

Meira kumar's competition is not with Chedi but Modi

मीरा के खाते में उनके पिता स्वर्गीय जगजीवन राम की विरासत, पति मंजुल कुमार की बिरादरी(कुशवाहा जाति का इस इलाके में खासा प्रभाव है), राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा कद, स्थानीय राजनीति के छल प्रपंच और दांव पेंज से दूरी, नहर, सड़क और सासाराम स्ठेशन पर ट्रेने रुकवाने जैसे विकास के काम और राजद के साथ गठबंधन से मुस्लिम और यादव मतदाताओं का एक मुश्त समर्थन जैसी मजबूत बाते हैं। इसलिए उनकी जीत को लेकर ज्यादा लोग संदेह नहीं करते हैं।

लेकिन नरेंद्र मोदी को एक बार देश की कमान संभालने का मौका देने की अनेक लोगों की इच्छा इतने सबके बावजूद भाजपा उम्मीदवार का हौसला बढ़ा रही है। आरा से मोहनिया के रास्ते में पडऩे वाले सासाराम क्षेत्र के कटियारा, उसरांव, कोचस, गबिनापुर, सेलास, शेख बहुअरा, सोहसा आदि जिन गांवों में जाकर लोगों से बात की गई, सबने मीरा और मोदी की लड़ाई की बात कही।

हाईवे से उतरकर करीब तीन चार किलोमीटर अंदर जाकर कटरा कला गांव में करीब छह हजार मतदाता हैं। ज्यादा आबादी भूमिहारों और ब्राह्मणों की है। गांव केविनय कुमार राय और उनके साथ खड़े लोग कहते हैं कि पांच साल में एक बार भी मीरा कुमार उनके गांव नहीं आईं। आए छेदी पासवान भी नहीं, जबकि वह इसी क्षेत्र से विधायक हैं। सवर्ण बहुल इस गांव में छेदी पासवान से लोग नाराज दिखे।

मीरा फिर भी मजबूत है

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सवर्ण यह भी बोले कि हम कमल और मोदी को देखकर सीने पर पत्थर रखकर भाजपा को वोट देंगे। लेकिन रोहतास सासाराम क्षेत्र के दूसरे गांवों चैनपुर,शुक्ल पिपरा,दादर,सकरी, चेनारी,डेहरी, खुर्माबाद, पखनारी, मोर सराय में मीरा कुमार को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। सासाराम से कुछ किलोमीटर पहले मोर सराय में जमावड़ा लगाए लोगों के झुंड में वासुदेव दास, वासुदेव सिंह कहते हैं कि यह बाबूजी का क्षेत्र है और हम उनका सम्मान खत्म नहीं होने देंगे। पास खड़े लोग मीरा कुमार द्वारा कराए गए काम गिनाने लगते हैं।

एक बुजुर्ग जो नाम नहीं बताते लेकिन यह कहते हैं कि दिल्ली में एक ही तो घर हैं जहां हर बिहारी की पूछ होती है, उसे हम कैसे खत्म होने देंगे। सकरी में दुलार चंद और सीता देवी बताते हैं कि जोर मीरा का है, लेकिन छेदी भी मुकाबले में है। सासाराम शहर में भी यही तस्वीर है। पहाड़ की तलहटी में स्थित तारा चंडी मंदिर प्रसिद्ध शक्ति पीठ है। नवरात्र के मौके पर भक्तों का तांता है।

वहां भी मीरा और छेदी के मुकाबले की बात करते हुए लोग मीरा का पलड़ा भारी बताते हैं। भाजपा समर्थक अपने पक्ष में दो बातें गिनाते हैं। सासाराम शहर में चौराहे पर खड़ी भीड़ में सबसे मुखर डाक विभाग में काम करने वाले दया शंकर सिंह राजपूत बिरादरी के हैं। कहते हैं कि मोदी की लहर है और लहर ही छेदी पासवान की नैया पार लगाएगी।

राजद से गठबंधन का फायदा

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जबकि अनिल कुमार दावा करते हैं बसपा उम्मीदवार बालेश्वर भारती और जद(यू) प्रत्याशी केपी रमैया के मैदान में रहने से दलित वोटों में विभाजन हो रहा है, जबकि भाजपा के पक्ष में सभी अगड़े एकजुट हैं। इसलिए मुकाबला कांटे का हो गया है।

मीरा कुमार के समर्थकों को भरोसा है कि लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन की वजह से राजद के यादव मतदाता उनके साथ एकजुट हैं, जबकि भाजपा उम्मीदवार छेदी पासवान यादवों में सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

यादव बिरादरी के प्रभावशाली नेताओं और मुखिया लोगों को अपने साथ लेने के लिए उन्हें हर तरह से मनाया जा रहा है। अपना नाम न बताते हुए एक राजद समर्थक यादव बुजुर्ग का कहना था कि हमें बंधुआ मजदूर मानने की भूल कांग्रेस वाले न करें। अगर सम्मान नहीं मिला तो हम अपना फैसला ले सकते हैं।

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