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बची हुई है मनमोहन-नवाज के बीच वार्ता की गुंजाइश

Fri, 09 Aug 2013 12:12 AM IST
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र Updated Fri, 09 Aug 2013 12:12 AM IST
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meeting may be possible manmohan and nawaz

पुंछ में भारतीय चौकी पर हुए हमले से उपजे तमाम मुश्किल हालातों के बावजूद भारत और पाकिस्तान ने नए सिरे से द्विपक्षीय बातचीत की गुंजाइश बनाए रखी है।

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रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार की जगह पाकिस्तानी सेना पर थोपकर तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस घटना पर अफसोस जताकर इसी आशय का संकेत दिया है।
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विदेश मंत्रालय का मानना है कि इस हमले ने वार्ता के खिलाफ एक माहौल जरूर बना है, मगर अब भी दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की न्यूयार्क में मिलने व बातचीत की संभावना पर विराम नहीं लगा है।
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उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को इस मामले में सरकार के सुर अचानक गरम तो हुए, लेकिन पाकिस्तान सरकार के बदले पाकिस्तानी सेना के खिलाफ। एंटनी ने अपने बयान में इस हमले का सारा दोष पाकिस्तानी सेना पर मढ़ा।


मुंबई हमले के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तो की, लेकिन संभावित वार्ता के लिए कोई पूर्व शर्त नहीं रखी।

उधर, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भी वार्ता की गुंजाइश बनाए रखने के लिए घटना के पूरे 72 घंटे बाद अफसोस जाहिर किया।

दोनों पक्षों को मिलजुल कर हालात सुधारने की अपील की। जबकि पाकिस्तान कभी ऐसे हमलों की स्वीकारोक्ति करने से भी बचता रहा है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस हमले ने जरूर वार्ता के खिलाफ एक बड़ा माहौल खड़ा किया है, मगर दोनों ही देश की सरकारें अब भी वार्ता को शुरू होने से पहले ही पटरी से उतारने के पक्ष में नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि यही कारण है कि तमाम सियासी दबाव और राजनीतिक बवंडर के बावजूद सरकार ने पाकिस्तान पर सीधा हमला करने का कूटनीतिक रास्ता अपनाया।

तीखी बात कही, धैर्य की परीक्षा न लेने की चेतावनी भी दी। मगर यह सारा कुछ पाकिस्तानी सेना के लिए था, न कि पाकिस्तान सरकार के लिए।

वैसे भी इस हमले के बाद भी सरकार ने द्विपक्षीय वार्ता का पक्षधर बने रहने के साफ संकेत दिए हैं। इस कड़ी में रक्षा मंत्री के पहले बयान में हमलावरों को आतंकवादी करार दिया गया, तो खुद विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि इस हमले से वार्ता प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

बीते बुधवार को विपक्ष से इस मुद्दे पर तनातनी के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा नेताओं को वार्ता का समर्थन करने के लिए मनाने की नाकाम कोशिश की।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि फिलहाल वार्ता की राह में मुश्किलें जरूर दिखती हैं, मगर अब भी मनमोहन-नवाज की मुलाकात के विकल्प खुले हैं।

भारत ही नहीं पाकिस्तान की सरकार भी नए सिरे से बातचीत शुरू करने के अपने पूर्व के फैसले पर कायम है।

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