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हंगामा करने वालों पर अंसारी का रुख कड़ा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sun, 21 Apr 2013 11:47 PM IST
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सदन को बिना शोर शराबे और व्यवस्थित ढंग से चलाने पर चर्चा के लिए राज्य सभा के सभापति हामिद अंसारी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तल्खियां कम होने की बजाय और बढ़ गई।
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तल्खियां बढ़ने का कारण अंसारी का हंगामा करने वाले सांसदों के स्वत: निलंबन और प्रश्नकाल का प्रसारण थोड़ी देर बार शुरू करने संबंधी प्रस्ताव था।
अंसारी चाहते थे कि हंगामा करने वाले सांसदों का नाम बुलेटिन में दिया जाए और इसके लिए जरूरी कानूनी बदलाव किया जाए।
इस पर भड़के विपक्षी नेताओं में से किसी ने इसे विपक्ष को जंजीर में बांधने वाला प्रस्ताव बताया तो किसी ने आशंका जताई कि इन प्रस्तावों का उपयोग सरकार विपक्ष पर मनमानी लादने के लिए करेगी।
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प्रस्ताव पर तीखे मतभेद के बीच सर्वदलीय बैठक बिना किसी नतीजे के ही खत्म हो गई।
सर्वदलीय बैठक में अंसारी ने कहा कि बीते 23 मार्च को जिस प्रकार अन्नाद्रमुक के सदस्यों ने श्रीलंकाई तमिलों के मसले पर सदन में तोड़फोड़ की, उससे सदन की गरिमा कम हुई है।
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भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए उपद्रवी सांसदों का स्वत: निलंबन और इनका नाम बुलेटिन में डालने के अतिरिक्त प्रश्नकाल का प्रसारण थोड़ी देर करने का प्रावधान होना चाहिए।
हालांकि अंसारी के इस आशय के प्रस्ताव का तत्काल विरोध शुरू हो गया।
राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि अगर इस आशय का नियम बना दिया गया तो सरकार इसका उपयोग विपक्ष का मुंह बंद कर विधेयकों को मनमाने ढंग से पारित कराने के लिए करेगी।
अच्छा हो कि सरकार को जवाबदेह बनाने की बात की जाए।
अंसारी को अपने प्रस्ताव पर एक भी विपक्षी पार्टी का समर्थन तो नहीं ही मिला, उल्टे माकपा सदस्य डी राजा ने सांसदों को उपद्रवी कहने पर बैठक में गहरी आपत्ति जताई और सवाल किया कि क्या यह सदस्यों की आवाज दबाने की तैयारी है।
सीताराम येचुरी का कहना था कि मुख्य समस्या सरकार की जवाबदेही से बचने की है। कई बार सदस्य बेहद मजबूरी में हंगामा, नारेबाजी और वॉक आउट करते हैं।
थोड़ी देर बार प्रसारण करने के बदले आसन इस बात का ध्यान रखे कि सरकार जवाबदेही का परिचय दे। शिवसेना ने इन प्रस्तावों को मीडिया की आवाज दबाने जैसा बताया।
हालांकि बैठक के बाद भी अंसारी अपने प्रस्तावों के समर्थन में डटे रहे। उन्होंने कहा कि सदन में कुछ सदस्यों का व्यवहार दुखी करने वाला है।
प्रजातंत्र का सबसे अहम मंच की सांसदों के ऐसे व्यवहार के कारण लोगों की निगाह में अच्छी तस्वीर नहीं बन पा रही।