मेरठ: बच्चा जेल से ऐसे फरार हुए 91 किशोर
मेरठ के बाल संप्रेक्षण गृह यानि बच्चा जेल से किशोरों के भागने में एक कर्मचारी की भूमिका सामने आई है। किशोरों से पूछताछ यह मामला उजागर हुआ है। वह कर्मचारी पहले भी कई बार किशोरों को नशीले पदार्थ उपलब्ध कराने में प्रकाश में आया था। उसके खिलाफ गोपनीय जांच बैठा दी गई है।
संप्रेक्षण गृह के किशोरों ने शनिवार को कर्मचारी से चालीस फीट लंबी रस्सी मंगवाई थी। उसे शाम को ही किशोरों ने पीछे की तरफ पार्क में लटका दी। वह बेहद कमजोर थी, इसलिये किशोरों ने भागने का प्लान बदला। रविवार शाम सात बजे एक दूसरे के कंबल जोड़कर भागने की व्यवस्था तैयार कर ली। संप्रेक्षण गृह में किशोरों ने तेज आवाज पर डीजे बजाया।
वहां पर तैनात पुलिसकर्मियों को अहसास था कि किशोर मौज मस्ती करने में लगे है। इसका फायदा उठाकर किशोरों ने दो ताले और एक विंडो तोड़ी और पांच-पांच की टोली बनाकर आसानी से फरार हो गए। बड़ा सवाल है कि कर्मचारी ने अंदर ही अंदर किशोरों की प्लानिंग में सहयोग किया और किसी को कानों कान खबर नहीं लगी। मंगलवार को एक किशोर ने पुलिस प्रशासनिक अफसरों को इस प्लान के बारे में बताया तब जाकर कर्मचारी पर जांच बैठी। एसपी सिटी ओमप्रकाश ने बताया कि कर्मचारियों के पहले भी संप्रेक्षण गृह में नशीले पदार्थ पहुंचाने या किशोरों को भगाने में सहयोग किया है। इस मामले की गंभीरता से जांच होगी।
पहले भी भाग चुके हैं किशोर
राजकीय संप्रेक्षण गृह से 91 किशोरों की फरारी में सरकारी इंतजाम ही मददगार साबित हुए। संप्रेक्षण गृह से सटा एक नाला है, जिसमें संचार विभाग के दो पाइप लगे हैं। पाइपों की चौड़ाई इतनी है कि उस पर चलकर आसानी से नाला पार किया जा सकता है। इसी का फायदा किशोरों ने उठाया और फरार हो गए।
किशोरों ने फरारी के लिए यह रास्ता पहली बार नहीं अपनाया। इससे पूर्व में जब भी संप्रेक्षण गृह से किशोर भागे, तो इसी रास्ते का इस्तेमाल किया गया। संप्रेक्षण गृह और गांधीनगर मोहल्ले के बीच में यही नाला है। रविवार रात किशोरों के भागने पर जब पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे, तो वहां कपड़ों से बांधकर बनाई गई रस्सी मिली। इस रस्सी का प्रयोग संप्रेक्षण गृह की बिल्डिंग से नीचे उतरने के साथ ही नाले को पार करने में भी पाइपों पर चलते समय किया गया। नाले के दूसरे छोर पर गांधीनगर की गलियों में किशोरों के पैरों के निशान मिले थे, जो नाले की कीचड़ में सने थे। वहीं एक पेंट भी मिली, जो नाले के पानी में भीगी हुई थी।
खास बात यह है कि संप्रेक्षण गृह की तरफ नाले पर ऊंची दीवार नहीं है। यदि पूर्व की घटनाओं से सबक लेते हुए यहां दीवार बना दी जाती तो शायद नाले की तरफ से किशोर भाग पाने में कामयाब नहीं होते। गांधीनगर के लोगों को भी बवाली किशोरों की अराजकता के कारण होने वाली परेशानी से कुछ राहत तो मिल ही जाती, मगर प्रशासनिक व्यवस्था ने कभी इस बारे में ध्यान ही नहीं दिया।
सहायक अधीक्षक निलंबित, एफआईआर के आदेश
राजकीय संप्रेक्षण गृह सूरजकुंड से 91 किशोरों की फरारी के मामले में सहायक अधीक्षक छोटे लाल को निलंबित कर दिया गया है। विशेष सचिव ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के भी आदेश दिए हैं। इसके साथ ही मेरठ डीपीओ का चार्ज सहारनपुर डीपीओ को सौंपने के आदेश दिए हैं।
संप्रेक्षण गृह से रविवार रात 91 किशोर फरार हो गए थे। सूचना पर सोमवार रात लखनऊ से पहुंचे विशेष सचिव महिला एवं बाल कल्याण विभाग एसके द्विवेदी ने रात में ही संप्रेक्षण गृह पहुंचकर मामले की जानकारी ली थी। रात में सर्किट हाउस में भी अधिकारियों से घटनाक्रम की जानकारी ली। मंगलवार को भी उन्होंने अब तक के तमाम मामलों की रिपोर्ट का परीक्षण किया और कर्मचारियों तथा अधिकारियों से बात की। सर्किट हाउस में पत्रकारों से वार्ता में द्विवेदी ने कहा कि पूरे मामले में प्रथम दृष्ट्या सहायक अधीक्षक छोटे लाल की गंभीर लापरवाही और उदासीनता सामने आई है। सहायक अधीक्षक का आवास बाल संप्रेक्षण गृह के भीतर ही है, लेकिन वह यहां नहीं रहते हैं। वह बहुत कम समय कार्यालय में रहते हैं। जांच में उनकी और भी तमाम खामियां सामने आई हैं। इससे उन्हें निलंबित करने के साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं।
विशेष सचिव ने बताया कि मेरठ का चार्ज सहारनपुर के जिला प्रोबेशन अधिकारी को सौंपने के आदेश भी दिए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि बाल संप्रेक्षण गृह में सुरक्षा के लिए 18 होमगार्ड लगाए गए हैं, लेकिन घटना के समय मात्र एक होमगार्ड मौजूद था। जिलाधिकारी को अनुपस्थित होमगार्ड के साथ ही उनके अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए कहा गया है। यही नहीं बाल संप्रेक्षण गृह के दो कर्मचारियों हरीश और प्रकाश के खिलाफ भी चार्जशीट जारी की जा रही है। एसएसपी ने ड्यूटी पर तैनात दो सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन उनसे इसकी जांच के लिए कहा गया है, ताकि यदि किसी और की भी लापरवाही है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
डीपीओ के खिलाफ तय मानी जा रही कार्रवाई
मेरठ डीपीओ का पद लंबे समय तक रिक्त रहा। इस पर जिला विकलांग कल्याण अधिकारी अतिरिक्त प्रभार पर रहे। कुछ माह पहले विकास कुमार की डीपीओ के पद पर तैनाती हुई, लेकिन वह भी अधिकांश अवकाश पर रहते हैं। ऐसे में मेरठ डीपीओ का चार्ज सहारनपुर को दिये जाने का आदेश तो विशेष सचिव दे चुके हैं। इस पूरे मामले में गोपनीय जांच के बाद डीपीओ के खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
बाल संप्रेक्षण गृह में रहेंगे मात्र 60 किशोर
विशेष सचिव महिला एवं बाल कल्याण विभाग एसके द्विवेदी ने बाल संप्रेक्षण गृह की क्षमता और गैर जनपदों के किशोरों पर कहा कि शीघ्र ही दूसरे जनपदों के किशोर यहां से शिफ्ट कर दिए जाएंगे। कहा कि बाल संप्रेक्षण गृह में 155 किशोर हैं, जिनमें 100 किशोरों को अतिशीघ्र शिफ्ट किया जा रहा है। बाल संप्रेक्षण गृह के जीर्णशीर्ण भवन पर कहा कि जब किशोर शिफ्ट हो जाएंगे तो इसके विस्तार की जरूरत नहीं है, लेकिन सुदृढ़ीकरण के लिए पैसा रिलीज किया जाएगा।