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अमरनाथ यात्रा से पहले अब लेना होगा मेडिकल सर्टिफिकेट

Thu, 13 Dec 2012 09:55 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 13 Dec 2012 09:55 PM IST
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medical certificate is necessary for amarnath yatra

बाबा बर्फानी के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं को अब तीर्थ यात्रा के लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र हासिल करना होगा। तीर्थयात्रा के दौरान हताहतों की हर साल बढ़ती संख्या के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। साथ ही उच्चतम अदालत ने तीर्थ यात्रा सुगम बनाने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए।

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जस्टिस बीएस चौहान और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की पीठ ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि यात्रा के इच्छुक श्रद्धालुओं को प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अस्पताल अधिसूचित किए जाएं। अस्पताल के साथ-साथ चिकित्सा अधिकारी का नाम भी बताया जाए, जो प्रमाणपत्र जारी करेगा।
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इसके अलावा यात्रा के रास्ते में हर दो किमी की दूरी पर चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाएं। सभी राज्यों खासतौर से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ सरकार से डॉक्टरों को अस्थायी ड्यूटी पर भेजने का निर्देश दिया है। डाक्टरों की सेवाएं हासिल करने के लिए जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव प्रतिवर्ष 30 अप्रैल तक सभी राज्यों के मुख्य सचिव तथा स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखेंगे।
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जम्मू-कश्मीर सरकार और अमरनाथ श्राइन बोर्ड दवाइयों के साथ-साथ सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराएगा, जिससे यात्रियों को जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। राज्य सरकार डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था भी करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीवेज सिस्टम तुरंत दुरुस्त किया जाए। बालटाल में विशेष रुप से सीवेज जल्द ठीक किया जाए। सीवेज के बारे में अगर किसी अदालत में मुकदमा विचाराधीन है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। पवित्र गुफा को शत प्रतिशत पारदर्शी बनाया जाए।

पंचतरणी से अमरनाथ गुफा तक जाने वाला रास्ता सीमेंट की प्री-फैब्रीकेटेड टाइल्स से तैयार करने का निर्देश दिया गया है। माता वैष्णों के दर्शन को जाने वाले रास्ते की तर्ज पर इस रोड के निर्माण का आदेश दिया गया है ताकि श्रद्धालु यात्रा के दौरान न फिसलें और पैदल यात्रियों के साथ कोई दुर्घटना न हो।


पीठ ने यात्रियों की सुविधा के लिए रास्तों के किनारों पर रेलिंग का निर्माण कराने को भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने तमाम समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर के आधार पर इस साल 12 जुलाई को स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। समाचार पत्रों में श्रद्धालुओं की मौत की खबरों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी। अदालत ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति का भी गठन किया। इस समिति की सिफारिशों को अदालत ने मंजूर कर लिया है।

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