फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   mayawati with modi after election

चुनाव के बाद मोदी के साथ आएंगी माया?

Wed, 05 Mar 2014 10:44 AM IST
Updated Wed, 05 Mar 2014 10:44 AM IST
विज्ञापन
mayawati with modi after election

लोकसभा चुनावों की तारीख़ों का एलान अब किसी भी दिन हो सकता है। सभी दल वोट पाने के लिए अलग-अलग समीकरणों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।

विज्ञापन


राष्ट्रीय फलक पर भारतीय जनता पार्टी भी इस बार दलितों को अपनी ओर रिझाने की पुरज़ोर कोशिश कर रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश के दलित उसके चुनावी गणित से बाहर हैं।
विज्ञापन


भाजपा ने दलित वोटों को अपनी ओर खींचने की शुरुआत इस साल जनवरी में की। पार्टी ने तमिलनाडु में वाइको के साथ गठबंधन का ऐलान किया। लोकसभा चुनाव से पहले यह इस राज्य का पहला राजनीतिक गठजोड़ था। इसके कुछ ही दिन बाद भाजपा ने महाराष्ट्र में रिपब्लिकन पार्टी के रामदास अठावले को राज्यसभा की एक सीट उपहार में दे दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

दलितों को लेकर भाजपा गंभीर

mayawati with modi after election

भाजपा दलितों को लेकर कितना गंभीर है इसका अंदाज़ा इसी बात से लग जाता है कि राज्यसभा की जो सीट अठावले को मिली वो पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर की थी। लेकिन इस बार जावड़ेकर को टिकट नहीं मिला।

बीते महीने भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी और इंडियन जस्टिस पार्टी के अध्यक्ष उदित राज भाजपा में शामिल हो गए जबकि कुछ दिन पहले बिहार में रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के साथ भाजपा ने गठजोड़ किया।

इन सभी दलित नेताओं का सीमित राजनीतिक वर्चस्व है, फिर भी उनका भाजपा के साथ जुड़ना अपने आप में बड़ी घटना है। लेकिन अचरज की बात ये है कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश में दलित वोटों को अपने पाले में खींचने के लिए अभी तक कोई ख़ास क़दम नहीं उठाया है।

अचानक दलितों की तरफ रुझान क्यों?

mayawati with modi after election

उत्तर प्रदेश में दलित वोट लगभग 24 प्रतिशत हैं और अगर भाजपा यहां से 50 सीट जीतने की उम्मीद लगाए है तो उसमें दलित वोटों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह से जब यह सवाल किया गया कि अगड़ों की पार्टी समझीं जाने वाली भाजपा का अचानक दलितों की तरफ यह रुझान क्यों? तो उनका उत्तर था कि उनकी पार्टी समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। दलितों को जोड़ने का यही सीधा अर्थ है।

जिन दलित नेताओं को पार्टी में शामिल किया गया है, उनके चुनाव जीतने की काबिलियत के बारे में पूछने पर राजनाथ सिंह ने कहा कि ये सभी व्यक्तिगत स्तर पर बड़े नेता हैं। ऐसे में पार्टी ने उत्तर प्रदेश में दलित वोट पाने के लिए कोई ख़ास कोशिश क्यों नहीं की? इस बारे में राजनाथ सिंह कहते हैं कि जो दलित नेता पार्टी से जुड़े हैं, उसका कुछ असर उत्तर प्रदेश में ज़रूर दिखेगा। उदित राज को बुद्धिजीवी वर्ग में बहुत सम्मान हासिल है।

कहां जाएगी बसपा?

mayawati with modi after election

कहा जा सकता है कि जिस तरह बसपा सर्वजन और सर्वधर्म की राजनीति कर रही हैं और उसी राजनीतिक विचार को लेकर अब भाजपा भी आगे बढ़ रही है। तो क्या चुनाव के बाद मायावती भाजपा की सरकार को समर्थन दे सकती हैं?

बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता रामअचल राजभर इस बात से पूरी तरह इंकार करते हैं। वो कहते हैं कि, "उत्तर प्रदेश में बहन मायावती के अलावा दलित वोट किसी और को नहीं मिलेगा।"

मायावती ने अभी तक तीसरे मोर्चे को लेकर अपनी कोई रूचि नहीं दिखाई है, जबकि उत्तर प्रदेश में तीन बार वो भाजपा साथ साझा सरकार बना चुकी हैं।

मायावती बनेंगी एनडीए का हिस्सा!

mayawati with modi after election

वरिष्ठ भाजपा नेता और लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहते हैं लेकिन इस संभावना से इंकार नहीं करते कि चुनाव के बाद मायावती एनडीए का हिस्सा बन सकती हैं।

दिनेश शर्मा कहते हैं कि नरेंद्र मोदी के पिछड़ी जाति से होने की वजह से उन्हें पिछड़ी जातियों का, विशेषकर लोध समुदाय का, ज़बरदस्त समर्थन मिल रहा है। दलितों में मायावती के जाटव वोट को छोड़कर दूसरों सभी दलित वर्ग जैसे सोनकर, पासी और राजभर भाजपा के पक्ष में नज़र आ रहे हैं।

शायद चुनाव के बाद की रणनीति को ध्यान में रखकर ही भाजपा उत्तर प्रदेश में दलित वोटों के प्रति अपनी उदासीनता दिखा रही है। इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन सरकार चलाने के बाद अब बसपा और भाजपा केंद्र में एक दूसरे से हाथ मिला सकती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed